हरियाणा को कांग्रेस मुक्त प्रदेश बनाने की तैयारी में है कांग्रेस

सिरसा(प्रैसवार्ता)। कांग्रेस मुक्त भारत बनाने का ख्वाब देख रही भाजपा की उम्मीदों पर हरियाणा प्रदेश खरा उतर रहा है, जहां कांग्रेसी ही कांग्रेस मुक्त हरियाणा बनाने में जुटे हुए है। हरियाणा में कांग्रेस के समांतर एक और कांग्रेस चल रही है, जिसका रिमोट पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र ङ्क्षसह हुड्डा के हाथ में है। भूपेंद्र हुड्डा का मौजूदा कांग्रेस प्रधान अशोक तंवर से छत्तीस का आंकड़ा है। तंवर भूपेंद्र हुड्डा को जितने राजनीतिक झटके देते है, उतना ही कांग्रेस का जनाधार खिसकता है। प्रदेश में कांग्रेस और समांतर कांग्रेस इस सीमा तक चल रही है कि कांग्रेस प्रभारी कमलनाथ तो क्या, कांग्रेस सुप्रीमों सोनिया गांधी भी इस आपसी कलह पर अंकुश नहीं लगा सकती। तंवर  के प्रधानगी पद संभालते ही कांग्रेसी स्वयं को कांग्रेसी कहलवाने से गुरेज करते देखे जाने लगे थे, क्योंकि कांग्रेस के पंद्रह विधायकों में से चौदह विधायक भूपेंद्र हुड्डा समर्थक होने के बावजूद किरण चौधरी को विधानसभा में नेता पद से नवाजा गया। भूपेंद्र हुड्डा की कांग्रेस में एक मात्र कांग्रेसी सांसद, चौदह मौजूदा कांग्रेसी विधायकों के साथ साथ तीन दर्जन से ज्यादा पूर्व सांसद व विधायक शामिल है, जबकि तंवर के पास राहुल गांधी का करीबी होना एक मात्र राजनीतिक हथियार है। प्रदेश का यदि कोई पूर्व विधायक कांग्रेसी ध्वज उठाता है, तो तंवर 'वह नहीं जानते' का राग अलाप कर कांग्रेसी ध्वज उठाने वाले का अपमान करने से नहीं चूंकते। तंवर को यदि सुश्री शैलजा, किरण चौधरी, कैप्टन अजय यादव सहयोग न करें तो हरियाणा को कांग्रेस मुक्त प्रदेश बनने में देरी नहीं लगेगी। भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों ने कैप्टन अजय यादव और किरण चौधरी पर फोक्स बनाया है और उन पर तीखे प्रहारों की बौछार शुरू की जा चुकी है। हरियाणा कांग्रेस के लिए समांतर कांग्रेस किसी चुनौती से कम नहीं आंकी जा सकती, क्योकि समांतर कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस के साथ चलने को तैयार नहीं दिखाई दे रही, तो दूसरी तरफ प्रदेशाध्यक्ष हरियाणा कांग्रेस अशोक तंवर कड़ी मेहनत कर रहे है कि संगठन को मजबूती देने के साथ साथ अपनी फौज बढ़ा सके। कांग्रेस प्रभारी कमलनाथ तंवर पर भूपेंद्र हुड्डा से समझौते का दवाब बनाएं, जिसके लिए तंवर तैयार नहीं होंगे। वहीं भूपेंद्र हुड्डा तंवर को पार्टी प्रधान स्वीकार करते दिखाई नहीं देते। हरियाणा कांग्रेस वर्तमान में ऐसे राजनीतिक मोड़ पर पहुंच चुकी है कि कांग्रेसी विघटन को रोका नहीं जा सकता। कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी भाजपाई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को ईमानदारी का प्रमाण पत्र देती है और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है। कैप्टन अजय यादव की अलग बज रही डफली भी कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं है। शकील अहमद के कार्यकाल में कांग्रेस और समान्तर कांग्रेस दोनो की डुगडुगी बजती थी, मगर क्या मौजूदा हरियाणा कांग्रेस प्रभारी कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस की तस्वीर बदलने में सफल हो पाएंगे? यह प्रश्न अपने आप में एक सवाल बनकर उभर रहा है। पार्टी संगठन को चलाने की जिम्मेवारी अशोक तंवर के पास है, तो वहीं भूपेंद्र हुड्डा तंवर का नेतृत्व स्वीकार नहीं कर रहा। ऐसे में कांग्रेस ही कांग्रेस मुक्त प्रदेश बनाने की ओर तेजी से बढ़ती दिखाई देती है।

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