जाटों की वकालत में ट्रेजिडी किंग के साथ हुई ज्यादती

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा में ट्रेजिडी किंग के नाम से प्रसिद्ध केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह डूमरखां को जाटों की वकालत तथा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर छोड़े गए राजनीतिक तीर महंगे पड़े है और उनसे ग्रामीण विकास मंत्रालय जैसा महत्त्वपूर्ण विभाग छीनकर स्टील मंत्रालय थमा दिया गया है। जाट वर्ग का चौधरी बनने का स्वप्न देख रहे डूमरखां को मोदी सरकार के झटके ने एक और ट्रेजिडी उपहार में दे दी है। इसी के साथ डूमरखां के ख्वाब पर ग्रहण लग गया है। वीरेंद्र सिंह ने अनेक सार्वजनिक स्थलों पर बैठकों में जाटों को आरक्षण की वकालत करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर तीखी टिप्पणी की थी। प्रदेश में जाट चौधरी बनने के लिए कैप्टन अभिमन्यु, ओपी धनखड़ व सुभाष बराला सहित भाजपाई, पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र हुड्डा, इनैलो नेता अभय चौटाला व कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला कतार में है, जबकि वीरेंद्र सिंह डूमरखां ने जाट वर्ग में पैंठ बनाने के प्रयास तो खूब किए, मगर सफल नहीं हो पाए। चार दशक तक कांग्रेसी ध्वज उठाने व महत्त्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभालने उपरांत भी डूमरखां  जाट वर्ग में लोकप्रियता बना नहीं पाए, क्योंकि उनका सदैव मुख्यमंत्रियों से छत्तीस का आंकड़ा रहा है। अपनी बयानबाजी के लिए कांग्रेस में कई बार मुसीबत खड़ी करने वाले वीरेंद्र डूमरखां का ऐसा प्रयास भाजपा में हो रहा है, जिसे देखते हुए भाजपा ने डूमरखां को राजनीतिक झटका दिया है। इतना ही नहीं, डूमरखां स्वास्थय मंत्री अनिल विज पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने से भी नहीं चूकें। राजनीतिक पंड़ितों का मानना है कि वीरेंद्र डूमरखां भाजपाई संस्कृति को समझ नहीं पाए। डूमरखां को मोदी मंत्रीमंडल द्वारा दिए गए राजनीतिक झटके से हरियाणा के जाट मायूस है, जबकि भाजपाई खुश दिखाई दे रहे है। वीरेंद्र सिंह से हरियाणा के लोगों को उम्मीद थी कि वह केंद्र में महत्त्वपूर्ण विभाग के मंत्री होने के नाते हरियाणा के लिए कई योजनाएं लाएंगे, मगर विकास की दृष्टि से सदैव दूर रहे डूमरखां की जाट वकालत ने हरियाणावासियों की उम्मीदों पर ग्रहण लगा दिया है।

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