महिलाओं को अपनी ताकत का अहसास करना पड़ेगा: शाहनाज हुसैन

70 के दशक में मुस्लिम समाज की एक महिला का स्वतंत्र उधम सोच के परे था, लेकिन अपने दृढ़ संकल्प से शहनाज़ हुसैन से न केवल शहनाज़  हुसैन ग्रूप ऑफ़ कंपनी की स्थापना की, बल्कि महिला  सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण बन गयी। आज उनके संस्थान से स्किल ग्रहण कर हज़ारो की संख्या में महिला अपना उधम चला रही है। शहनाज़  हुसैन ग्रूप ऑफ़ कंपनीज़ की अध्यक्ष व प्रबंधक निर्देशक मानती है कि अगर हौसला हो तो महिलाए पुरुष से भी अधिक सफल हो सकती है। पेश है शहनाज़ हुसैन के साक्षात्कार के प्रमुख अंश:- 
70 के दशक में आपने शहनाज़ हुसैन ब्रांड की स्थापना की। तब एक परंपरावादी पृष्ठभूमि से आने के कारण आपको खासतौर पर किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
मैंने सौंदर्य के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया और पश्चिम के ब्यूटी  स्कूलों में प्रशिक्षण लिया।  मैंने अपना पहला सैलून अपने घर में खोला, ताकि मैं अपने बच्चे व परिवार को समय दे सकू। परिवार के समर्थन व सहयोग से मुझे बाधाओ को पार करने व सपनों को साकार करने में मदद मिली।  मेरी फ्रेंचाइजिग़ प्रणाली की वजह से मेरे सैलूनो का तेज़ी से विस्तार हुआ। मैं सफलता की आकांक्षा, दृढ इच्छा सकती व कठोर मेहनत के जरिए अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करना चाहती थी। 
क्या आर्थिक स्वतंत्रता के बिना महिला सशक्तिकरण संभव है ?
मैं मानती हूँ कि महिला सशक्तिकरण के लिए आर्थिक स्वतंत्रता बहुत ज़रूरी है। इससे महिला महिला आत्मनिर्भर बनती है और उसका आत्मविश्वास मजबूत होता है। जब पति और पत्नी दोनों कमाते तो परिवार के जीवन शैली में भी सुधार आता है। वैसे परिवार के अंदर नज़रिए में बदलाव लाना बेहद ज़रूरी है और ऐसा बदलाव शिक्षा के ज़रिए आ सकता है। असल में शिक्षा अपने आपमें एक तरह का सशक्तिकरण है। 
आपने अनेकों महिलाओं को प्रशिक्षित  कर आत्मनिर्भर बनाया है , इस अनुभव पर रोशनी डालें  ?
मैंने अपने कैरियर के शुरुआती दौर में ही महिलाओं को अपने घर में सैलून खोलने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया था ताकि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सके और बच्चे व परिवार का देखभाल कर सके। मैंने उन्हें  प्रशिक्षित किया और सशक्त बिजनेस मॉडल के साथ शहनाज़ हर्बल का फ्रेंचाइज़ी देना शुरू किया।  हम अपने सीएसआर गतिविधियों के तहत मूक - बधिर एव नेत्रहीनों को मुफ्त प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है। इस तरह उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता प्रदान करने में सहयोग किया जा रहा है। हाल ही में हमने अल्पसंख्यक मामले का मंत्रालय की एक योजना के तहत 6000 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर सर्टिफाई किया है। .हमने अपने ब्यूटी अकादमी में पिछले चार सालो दशको में हज़ारों महिलाओं को प्रशिक्षित किया। इनमे से कई ने अपने ब्यूटी सैलून खोले। कईयो ने शहनाज़ हर्बल सैलून, स्पा, रिटेल आउटलेट खोलने के लिए मुझसे फ्रेंचाइजी अधिकार लिए है। 
क्या आप अब भी निर्धन महिलाओ को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है ?
दक्षता विकाश कार्यक्रम के जरिए हम निर्धन महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहे है। इनमे से कईयो ने छोटे स्तर पर अपने ब्यूटी सैलून खोले है या फ्रीलांसर के रूप में उपार्जन कर रही है। इस तरह वो अपने घर में ही ग्राहकों को ब्यूटी केयर सेवा प्रदान कर रही है। हम सामाजिक हितो के प्रति समर्पित है और शारीरिक रूप से अक्षम, मूक बधिर एवं नेत्रहीनों को को नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है। उनमे से कई ने परिवार की मदद से सैलून खोले है।  हम महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए घर में ही छोटे स्तर पर सैलून खोलने के लिए प्रोत्साहित करते है। हमारे ब्यूटी पाठ्यक्रम में बुनियादी सैलून प्रबंधन और व्यवसाय प्रबंधन शामिल है। 
आप युवा महिलाओं खासतौर पर मुस्लिम समुदाय की स्त्रियों को कोई संदेश देना चाहेंगी ?
वर्तमान समय में महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण व दक्षता विकाश अत्यंत ज़रूरी है। देश में शिक्षा की कमी अभी अहम् समस्या है। बदलाव लाने के लिए महिलाओं की बुनियादी शिक्षा व जागरूकता ज़रूरी है  अल्पसंख्यक मामले का मंत्रालय महिलाओं को ज्ञान ,उपकरण और तकनिकी प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना चाहता है जिससे वे सरकारी व गैर सरकारी एजेंसियों की योजनाओं का लाभ उठा सकती है। महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थय, स्वच्छता, टीकाकरण और परिवार नियोजन संबंधी योजनाओं के बारे में जागरूक बनाने की ज़रूरत है।  मानसिकता में भी बदलाव करने की ज़रूरत है। महिलाओं को अपनी ताकत का अहसास करना पड़ेगा और समाज में अपनी बराबरी की हैसियत कायम करना होगा । महिलाओं को स्वतंत्र बनाने के लिए शिक्षा की अहम भूमिका होगी।  माता पिता को भी बेटियों की अहमियत समझनी होगी और उनको समान अवसर देना होगा। (मोनिब खान)

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