12 दिसंबर को नगर परिषद की चौधर को लेकर स्टोरिये सक्रिय

सिरसा(प्रैसवार्ता)। 25 सितंबर को सिरसा के 31 वार्डों में हुए परिषद के चुनाव में मतदाता अपना निर्णय दे चुके है, मगर उन्हें परिषद की चौधर के लिए 12 दिसंबर तक का इंतजार करना होगा। 12 दिसंबर को होने वाले परिषद की चेयरपर्सन और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर स्टोरिये सक्रिय हो गए है। परिषद पर भगवा ध्वज लहराएगा या नहीं, को लेकर असंजमस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि 31 पार्षदों में से 15 भाजपाई हैं तथा उन्हें दो आजाद समर्थकों का भी समर्थन हासिल है, जबकि कांग्रेस के पास पांच, हलोपा के पास आधा दर्जन, इनैलो के पास मात्र एक दो निर्दलीय पार्षदों के अतिरिक्त इनैलो के सांसद, विधायक भी वोट डाल सकते है। परिषद चुनाव ने कभी सैंतीस का आंकडा रखने वाले हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर तथा हलोपा सुप्रीमों गोपाल कांडा को एक मंच पर ला दिया है। भाजपाई परिषद बनने से रोकने के लिए इनैलो यदि कांग्रेस, हलोपा को समर्थन दे सकती है, तो भाजपा के जिला में तेजी से बढ़ रहे रथ पर अंकुश लग सकता है। भाजपा ने जिला की सभी सातों खंड समितियों में इनैलो को गहरा राजनीतिक घाव देकर भगवा ध्वज फहराने में सफलता हासिल की है। पिछले परिषद चुनाव में इनैलो के 19 पार्षद विजयी हुए थे, जबकि इस बार मात्र एक पार्षद ही इनैलो की झोली में आया है। इसके बावजूद भाजपाई परिषद बनने से रोकने में इनैलो की महत्त्वपूर्ण भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती। दरअसल परिषद चौधर को लेकर भाजपाई दिग्गजों की सहमति नहीं बन पा रही, जिस कारण निर्धारित समय पर भाजपाई पार्षदों की गैर हाजरी के चलते चुनाव तिथि बदलनी पड़ी है। निर्वाचन अधिकारी 12 दिसंबर की तिथि चुनाव के लिए निर्धारित कर चुके है, मगर ऐसी कोई संभावनाएं नजर आ रही कि भाजपाईयों को सहमति बनाने के लिए एक कठिन परीक्षा से गुजरना होगा। विपक्षी पार्षदों की कमान काण्डा बंधुओं के हाथ में है, जो परिषद पर अपनी चौधर के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे है। भाजपाई दिग्गजों की हठकर्मी के चलते कांडा बंधुओं की लॉटरी खुल सकती है। चर्चा तो यह भी है कि कई भाजपाई पार्षद कांडा बंधुओं के संपर्क में है। शायद यहीं कारण रहा होगा कि कांडा बंधु गुप्त वोट डालने की वकालत कर रहे है। स्टोरिये शहर की राजनीति पर फोक्स बनाकर सट्टा खेल रहे है, जबकि मतदाता बेसब्री से परिषद की चौधर पर नजर लगाए हुए है।

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