बच्चों में पैदायशी हृदय रोगों का बढ़ता स्तर खतरनाक : डा.सुशील आजाद

सिरसा(प्रैसवार्ता)। दिल्ली के फोर्टिस एस्कार्टस हार्ट इंस्टीट्यूट के पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डा.सुशील आजाद बीते बुधवार की सुबह सिरसा शहर में पहुँचे। इसी दिन एक निजी होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डॉ. आजाद ने कहा कि भारत में बच्चों में पैदायशी हृदय रोग की बढ़ती संख्या से भी ज्यादा चिंताजनक इन बीमारियों के प्रति अज्ञानता का अभाव है जिसके चलते हजारों बच्चे प्रतिवर्ष मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। समय रहते जांच व उपचार के द्वारा इन बच्चों की जान बचाई जा सकती है। 

पैदायशी रोग के इलाज में तरक्की
डा.सुशील आजाद ने कहा कि पैदायशी हृदय रोग उस स्थिति को कहा जाता है जिसमें बच्चे के जन्म के समय से ही उसके हृदय में किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है। हालांकि इनमें से कुछ गड़बडिय़ों का पता जन्म के समय नहीं बल्कि बाद में ही पता चल पाता है। ऐसे तकरीबन 33 से 50 प्रतिशत मामले गंभीर होते हैं और बच्चे के जन्म के पहले साल में ही इलाज करवाने की आवश्यकता पड़ती है। पिछले छह दशकों के दौरान नवजात शिशुओं तथा बच्चें में पैदायशी हृदय रोग के इलाज में बड़ी तेजी से तरक्की हुई है। उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों की बदौलत बच्चे के गर्भ में रहते ही उसकी बीमारी का सटीक निदान मिलने लगा है। इससे क्रिटिकल हृदय रोग के साथ जन्मे लगभग 75 प्रतिशत बच्चों को जन्म के एक साल बाद भी इलाज के जरिए जीवित रखना संभव हो गया है। हालांकि इस रोग के सटीक निदान तथा इलाज की राह में एक बड़ी बाधा इस बारे में लोगों में जागरूकता का घोर अभाव है।

हृदय रोगों का इलाज जरूरी
भारत में प्रतिवर्ष जन्मे 1000 बच्चों में से लगभग 6 से 8 बच्चे पैदायशी हृदय रोगों से पीडि़त होते हैं। पैदायशी हृदय रोगों का इलाज अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि उच्च अस्वस्थता दर और मृत्यु दाय के लिए इसे सबसे ज्यादा जिम्मेवार कारकों में माना गया है। इस रोग के दीर्घकालीन प्रभाव का इलाज सर्जरी, कैथेटर पद्धतियों और दवाइयों से किया जाता है जबकि गंभीर मामलों में कई बार ट्रांसप्लांट भी कराना पड़ सकता है। 

अब सिरसा में भी होगी ओपीडी
डॉ. सुशील आजाद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके अस्पताल फोर्टिस का सिरसा में खुराना अस्पताल से टाईअप हुआ है। अब महीने में एक बार वे अपनी सेवाएं सिरसा के खुराना अस्पताल में देंगे। प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह के बुधवार को यह सेवाएं देने का निर्णय लिया गया है।

ये है लक्षण
डा.सुशील आजाद ने बताया कि बच्चों को बार-बार निमोनिया होना, जल्दी थकावट आना, हाथ-पैर या होंठ का नीला पडऩा आदि बच्चों में हृदय रोग के लक्षण है, जबकि नवजात शिशुओं में यह बीमारी शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा ही जांची जा सकती है। 



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