पारदर्शी छवि बरकरार रखने के लिए अपनों पर भी फोक्स रखा है खट्टर ने

सिरसा(प्रैसवार्ता)। मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहर लाल खट्टर ने अपनी ईमानदारी से शासन चलाने के साथ साथ पारदर्शी छवि बरकरार रखने के लिए अपनों को आईना दिखाने से परहेज नहीं किया है। कर्म प्रधान सोच को तव्वजों देते हुए मनोहर लाल ने अपने 25 महीने के कार्यकाल में अपने विश्वासपात्रों में से पांच को मुख्यमंत्री कार्यालय से बाहर का रास्ता दिखाया है, जो मुख्यमंत्री की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाये। ऐसे  ही पांच चेहरों में जगदीश चौपड़ा भी एक है, जिन्हें मुख्यमंत्री का राजनीतिक सलाहकार बनाया गया था। अपने कार्यकाल में जगदीश चौपड़ा ने इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले सिरसा में हुए पंचायती तथा निकाय चुनावों में अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया, लेकिन परिषद सिरसा के चुनाव परिणाम उनकी राजनीतिक सोच पर भारी पड़ गए। 31 वार्डों वाली सिरसा नगर परिषद में 15 भाजपाई पार्षद चुने गए है, जबकि दो आजाद पार्षदों ने भाजपाई ध्वज उठा लिया है। प्रधानगी की दहलीज पर पहुँचकर भाजपा परिषद के लिए अपने चेयरपर्सन तथा उपाध्यक्ष तय नहीं कर पाई है। सिरसा में  भाजपा चौपड़ा के अतिरिक्त भाजपा की अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. गणेशी लाल तथा भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ चुकी सुनीता सेतिया के इर्द-गिर्द घूमती देखी जा सकती है। भाजपा के तीन दिग्गजों से वैचारिक मतभेदों की बदौलत 25 सितंबर को परिषद चुनाव उपरांत भाजपा बहुमत होते हुए भी चौधर पर काबिज नहीं हो सकी। चौपड़ा ने भाजपा को मजबूती देने की बजाए स्वयं को मजबूत करने के लिए अपने  रेणु बाला, कुमुद बांसल, गुरदेव सिंह राही, रतन लाल बामनिया की सत्ता में भागीदारी के साथ यतिन्द्र सिंह एडवोकेट को पार्टी का जिलाध्यक्ष, अमन चौपड़ा को भाजपा युवा प्रकोष्ठ का प्रांतीय उपाध्यक्ष, सुनील बामनिया को भाजपा युवा मोर्चा की जिला कमान से सुशोभित करवाया, ताकि उन्हें मजबूती मिल सके। चौपड़ा की भाजपा पर बढ़ रही शक्ति से प्रौफेसर गणेशी लाल व सुनीता सेतिया का सकते में आना स्वाभाविक था, जिसकी वजह से भाजपा त्रिशुंक होकर तीन घड़ो में देखी जाने लगी। चौपड़ा ने इनैलो के कई दिग्गजों को भाजपाई ध्वज थमाकर पार्टी का जनाधार तो बढ़ाया, लेकिन अपने भाजपाई परिवार में बिखराव को रोक नहीं पाए। त्रिशुंक भाजपा और भाजपाई दिग्गजों की अलग-अलग राजनीतिक गतिविधियों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को हस्तक्षेप करना पड़ा और शीर्ष नेतृत्व को वास्तविकता से अवगत करवाया गया। सूत्रों के अनुसार शीर्ष नेतृत्व ने मंथन उपरांत चौपड़ा की मुख्यमंत्री कार्यालय से अलविदाई देने का फरमान जारी कर दिया है। चौपड़ा ने अपने कार्यकाल में सरकार पर आई मुसीबतों में संकट मोचक बनकर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है, फिर भी उन्हें राजनीतिक सलाहकार पद से हटाकर पर्यटन निगम की चेयरमैनी दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय में हुए इस बदलाव में स्पष्ट हो गया है कि कि मुख्यमंत्री कर्म प्रधान सोच के चलते अपनी सरकार की तथा स्वयं की पारदर्शी छवि बरकरार रखने के लिए अपने विश्वासपात्रों पर भी फोक्स रखते है और उनकी उम्मीदों पर खरा न उतरने वालों से दूरी बनाने से गुरेज नहीं करेंगे।

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