हरियाणवी राजनीति में 'आपणी' ने दी दस्तक: पूर्व सांसद इंदौरा होंगे सर्वेसर्वा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी राजनीति में नववर्ष पर 'आपणी' नामक एक नई राजनीतिक पार्टी ने दस्तक दे दी है, जिसके सर्वेसर्वा पूर्व सांसद सुशील इंदौरा बने है। नई पार्टी का राजनीतिक भविष्य क्या रहेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, परंतु हरियाणवी राजनीति के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालने से पता चलता है कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह, स्वर्गीय बंसी लाल व भजन लाल तथा पूर्व मंत्री स्वर्गीय ओम प्रकाश जिंदल जैसे धुरन्धरों ने अपनी-अपनी राजनीतिक पार्टियां बनाई, जो अब हरियाणवी राजनीतिक मानचित्र पर दिखाई नहीं देती। प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां है, जिनमें से हलोपा ही एक मात्र ऐसा राजनीतिक दल है, जिसके 73 विधानसभा क्षेत्रों से प्रतिनिधियों ने अपनी चुनावी भाग्य अजमाया था। हलोपा आज भी अपना वजूद कायम रखे हुए है। इंदौरा ने पूर्व सांसद हेतराम के सहयोग से नई पार्टी के गठन जोर-शोर से बिगुल बजाया हुआ था, मगर पार्टी के गठन की घोषणा के समय हेतराम गायब देखे गए। सुशील इंदौरा सक्रिय राजनीतिक कहे जा सकते है, जिन्होंने अपनी राजनीतिक शुरूआत संसदीय क्षेत्र सिरसा से इनैलो का ध्वज उठाकर करते हुए लोकसभा में उपस्थिति दर्ज करवाई। इंदौरा विधायक भी रहे है और पिछले कुछ समय से इनैलो से अलविदाई लेकर हजकां, बसपा व हलोपा के सहयोग से अपना राजनीतिक भविष्य अजमा चुके है, जिसमें सफलता नहीं मिल पाई। हजकां का कांग्रेस में विलय हो चुका है। इंदौरा की राजनीतिक सोच है कि वह केजरीवाल की तरह अकेले अपने बलबूते पर राष्ट्रीय राजनीति पर उभरे और बसपा सुप्रीमों मायावती की तरह राजनीति करें। इंदौरा की इस सोच से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि किसी राजनीतिक दल के समक्ष टिकट की गुहार लगाने से बेहतर तो यहीं है कि लोग टिकट के लिए उनके समक्ष गिड़गिड़ाए। इसी स्वपन को देखते हुए इनैलो की तर्ज पर चलते हुए इंदौरा ने सर्वाधिकार अपने पास सुरक्षित रखें है। इंदौरा ने राजनीति में आने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा, जबकि राजनीति ने उन्हें आगे बढऩे नहीं दिया। इंदौरा 36 बिरादरी के लोगों को साथ लेकर कमजोर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करने का दावा करते हुए कहते है कि उनकी पार्टी महिलाओं तथा युवा वर्ग का विशेष ध्यान रखेगी। राजनीतिक पंडित इंदौरा के इस प्रयास को इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले सिरसा संसदीय क्षेत्र में इनैलो की सेंधमारी बता रहें है, वहीं इनैलो का ध्वज उठाकर राजनीति में पहचान बना चुके इंदौरा के इस प्रयास पर बेरोकटोक टीपा-टिप्पणी भी हो रही है। इनैलो के इस गढ़ में पहले हलोपा इनैलो को राजनीतिक झटका दे चुकी है, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा प्रयास जारी है। 'आपणी' का विश्लेषण अंग्रेजी अल्फाबेट शब्दों के मुताबिक 'आलवेज अमंग दी पीपल नेशनल्टी एंड इंटीग्रिटी' के रूप में बताते हुए इंदौरा ने इसे नई पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद स्वयं संभालने की जिम्मेवारी का प्रस्ताव भी पारित करवाकर सहयोगी पूर्व सांसद हेतराम को दरकिनार करते हुए शुरूआती दौर में ही अपना राजनीतिक आईना दिखा दिया हैं।

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