हाथ को हाथ दिखाने की तैयारी में जुटी हरियाणवी कांग्रेस

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सिरसा(प्रैसवार्ता)। आपसी कलह से जूझ रही हरियाणवी कांग्रेस में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कलह  पर अंकुश लगाने का प्रयास करने की बजाए उस पर नमक छिड़कते हुए वफादार कांग्रेसीजनों को उलझन में डाल दिया है, जिससे हरियाणवी कांग्रेस को काफी राजनीतिक क्षति देखनी पड़ सकती है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने तीन वर्ष पूर्व सभी कांग्रेसी दिग्गजों व कांग्रेसीजनों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से पूर्व सांसद अशोक तंवर को जिम्मेवारी सौंपी थी, जिसमें तंवर के प्रयासों को सफलता नहीं मिली, बल्कि तंवर के राजनीतिक मतभेदों के चलते पूर्व सीएम हरियाणा भूपेंद्र हुड्डा की समांतर कांग्रेस ने तंवर की बैठकों से परहेज करते हुए भूपेंद्र हुड्डा पर ही अपना फोक्स बनाए रखा। भूपेंद्र हुड्डा के प्रभावी शक्ति प्रदर्शन, सांसद, कांग्रेसी विधायकों, पूर्व सांसदों व विधायकों के साथ साथ युवा कांग्रेस में हुड्डा का पलड़ा भारी रहने के कारण प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं नजर आने लगी थी, जिस पर शीर्ष नेतृत्व ने ग्रहण लगाते हुए पुन: तंवर पर ही दाव खेलने का फैसला लेकर कांग्रेसीजनों को उलझा कर रख दिया है। भूपेंद्र हुड्डा और तंवर के बीच राजनीतिक मतभेदों की चिंगारी अभी बुझी ही नहीं थी कि 6 अक्टूबर को दिल्ली में हुई कांग्रेसी जंग के चलते राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत आठ कांग्रेसीजनों पर एस.सी.एस.टी एक्ट के तहत मामला दर्ज करके राज्य की राजनीति में हडकंप मचा दिया है। आयोग में बहादुरगढ़ निवासी कमलजीत एडवोकेट ने गुहार लगाते हुए कहा था कि  6 अक्टूबर को राहुल गांधी के एक कार्यक्रम में तंवर के खिलाफ 30-40 व्यक्तियों ने, जोकि लाठियों व हथियारों से लैस थे, नारेबाजी करके भूपेंद्र हुड्डा व उनके सांसद पुत्र दीपेंद्र हुड्डा के पक्ष में नारे लगाने शुरू किए, तो बिगड़ते माहौल में तंवर ने दोनो पक्षों के कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया, तो उस पर हमला करके उन्हें जातिसूचक गालियां दी, जिससे तंवर घायल हो गए और उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करवाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि घटनाक्रम के पीछे पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, मोनू हुड्डा, बिट्टू हुड्डा इत्यादि की शह थी। आयोग ने तथ्यों को स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस को मामला दर्ज करने के निर्देश दिया। भूपेंद्र हुड्डा इत्यादि पर दर्ज हुए मुकद्दमे से हरियाणवी कांग्रेस में किसी भी समय राजनीतिक भूकंप आ सकता है, ऐसे आसार नजर आने लगे है।

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