रणजीत सिंह ने जिलास्तरीय बैठक कर क्यासों पर लगाया ग्रहण

ranjeet singh
सिरसा(प्रैसवार्ता)। इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले सिरसा संसदीय क्षेत्र में इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला के छोटे भाई एवं पूर्व सांसद रणजीत सिंह ने जिलास्तरीय एक बैठक करके उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर उभर रहे क्यासों पर विराम लगाने का प्रयास करके  सिरसा की राजनीति में हलचल मचा दी है। राजनीति के बेमौसमी समय में हुई इस बैठक में रणजीत सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि वह कांग्रेस में ही रहकर राजनीति करेंगे। सिरसा संसदीय क्षेत्र में रणजीत सिंह का कुछ जनाधार भी है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता, मगर रणजीत सिंह की इस बैठक में पूर्व सांसद आत्मा सिंह गिल की उपस्थिति और मौजूदा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर पर छोड़े गए राजनीतिक बाण ने फिर क्यासों को जन्म दे दिया है। आत्मा सिंह गिल और अशोक तंवर दोनो कांग्रेसी दिग्गज ही संसदीय क्षेत्र सिरसा का प्रतिनिधित्व कर चुके है। राजनीतिक क्षेत्रों में यह भी चर्चा थी कि रणजीत  सिंह भगवा ध्वज उठाकर हिसार संसदीय क्षेत्र से राजनीतिक पारी खेलने की तैयारी कर रहे है, जहां से वह पहले भी अपना चुनावी भाग्य अजमा चुके है। वर्तमान में इनैलो के दुष्यंत चौटाला सांसद है, जोकि इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला के पौत्र है। इस चर्चा को दर किनार करते हुए रणजीत सिंह ने मौजूदा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर पर राजनीतिक विरोध कर संकेत देते हुए आत्मा सिंह गिल को प्रौजेक्ट करके संसदीय क्षेत्र सिरसा में हलचल मचा दी है। राजनीतिक पंडित यह मानकर चल रहे है कि तंवर के  राजनीतिक विरोधी भूपेंद्र हुड्डा के इशारे पर संसदीय क्षेत्र सिरसा में आत्मा सिंह गिल को तैयार किया जा रहा है, जो कांग्रेस टिकट न मिलने पर बागी चुनावी समर में उतर कर कांग्रेस प्रत्याशी के लिए परेशानी का सबब बन रह है। रणजीत सिंह की इस जिला स्तरीय बेमौसमी बैठक का उद्देश्य भले ही कोई रहा हो, मगर अशोक तंवर की इस बैठक से बेचैनी जरूर बढ़ सकती है। रणजीत सिंह की इस राजनीतिक सक्रियता के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की राजनीति को जोड़कर भी देखा जा रहा है, जो पर्दे के पीछे अशोक तंवर को राजनीतिक तौर पर कमजोर करना चाहते है। रणजीत सिंह ने अपनी जिला स्तरीय इस कार्यकर्ता बैठक में कांग्रेसी दिग्गजों से दूरी बनाते हुए अपने बलबूते पर राजनीतिक शक्ति दर्शाकर जिलाभर की राजनीति एक ऐसी डुगडुगी बजा दी है, जिससे राजनीतिक दिग्गजों ने क्यासों का हडकंप मच गया है।

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