आसान नहीं रहा खट्टर की मुख्यमंत्री कुर्सी को हिलाना

cm khattar
सिरसा(प्रैसवार्ता)। सीएम हरियाणा मनोहर लाल खट्टर की कुर्सी पर बैठने के लिए बेताब उनके कई अपनों के हर प्रयास पर ग्रहण लगाने से संकेत मिलता है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री की कुर्सी को हिला पाना संभव नहीं है। बरवाला के संत रामपाल प्रकरण हो या प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर हुआ हिसंक तांडव प्रदर्शन से मुख्यमंत्री पर संकट के बादल जरूर छाए, मगर बरस नहीं सके, क्योंकि स्वच्छ, बेदाग छवि व स्वस्थ नीयत के स्वामी मनोहर लाल खट्टर पर ईश्वरीय कृपा बनी रही। दो बार मंडराये खतरे से बाल-बाल बचने वाले खट्टर तीसरे साजिशनुमा राजनीतिक हमले से भी बच निकले है। यह तीसरा आक्रमण खट्टर के अपनों पर ही सवालिया निशान लगाता है, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर लगाए हुए है। अपनों की साजिश से बेखबर होकर गुमराह होकर यदि सतर्क न होते, तो जाट दिल्ली कूच कर जाते और इसी के साथ खट्टर की अलविदाई की पटकथा भी लिखी जा सकती थी। चर्चा है कि खट्टर सरकार के एक मंत्री के गलत मश्वरे के चलते प्रदेश एक बार पुन: हिंसा की चपेट में आ सकता था। खट्टर ने जाट नेताओं से बातचीत करके प्रदेश में शांति का माहौल बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जाटों का दिल्ली कूच यदि रद्द न होता, तो फतेहाबाद में भड़की चिंगारी पूरे प्रदेश में फैल सकती थी। सरकार ने जाटों से बातचीत के लिए जिस कमेटी का गठन किया था, वह सरकार की मुश्किलें बढ़ाती देखी गई। खुफिया तंत्र की सतर्कता की वजह से जाट प्रकरण कोई बड़ा रूप नहीं ले सका। समझौता कमेटी के मुखिया ने तो जाट नेताओं की मुख्यमंत्री से बातचीत न करवाने का कार्ड खेला, ताकि जाट नेताओं के आक्रोश तेवर बढ़ जाए और वह मुख्यमंत्री पर धोखा का आरोप लगाकर जाटों को भड़का सके। खुफिया तंत्र की रिपोर्ट पर केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री को तुंरत समझौता कमान अपने हाथ में लेकर जाट नेताओं से संपर्क के लिए कहा। प्रदेश के जाटों के बगावती तेवर और सुरक्षा बलों के सुरक्षा प्रबंधों को लेकर टकराव की संभावना को खुफिया रिपोर्ट पर केंद्र सरकार के निर्देश पर केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह व मुख्यमंत्री हरियाणा खट्टर की जाट नेताओं से बातचीत एक बड़ी राहत मिली और जाटों का दिल्ली कूच कार्यक्रम रद्द हो गया। सीएम से खफा मंत्री, सांसद व विधायकों के स्वपन पर भी  ग्रहण लग गया, जो इस प्रकरण के बाद मुख्यमंत्री से अलविदाई का ख्वाब पाले हुए थे। तीसरी बार राजनीतिक झटके से उभरे खट्टर का अब फोक्स उन पर रहेगा, जो उनके लिए राजनीतिक परेशानियां उत्पन्न करते है। आरएसएस के दिग्गजों पर विश्वास जमाने में सफल रहे खट्टर की मुख्यमंत्री कुर्सी हिलाने का ख्वाब देखने वालों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा, क्योंकि खट्टर की अलविदाई उनके लिए आसान दिखाई नहीं देती।

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