हरियाणवी कांग्रेस राम भरोसे: अशोक तंवर ने बढ़ाई राजनीतिक गतिविधियां, हुड्डा समर्थकों ने दी चेतावनी

ashok tanwar
सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी कांग्रेस के कप्तान डॉ. अशोक तंवर की ओर से करनाल में दलित युवा सम्मेलन तथा सिरसा में प्रजापति सम्मेलन करके अपनी राजनीतिक शक्ति दिखाने का अभियान तेज कर दिया है और तंवर ने बेमौसमी चुनावी मौसम में राजनीतिक गर्माहट पैदा कर दी है। तंवर निकट भविष्य में व्यापारी सम्मेलन की तैयारी करने में जुट गए है। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद तंवर की सक्रियता से संकेत मिलते है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से उन्हें हरी झंडी मिल गई है। राजनीतिक विशेषज्ञों की नजरें प्रदेश में जिलाध्यक्षों की सूची पर है, जो तंवर के राजनीतिक कद का आईना दिखाएंगे। अशोक तंवर की सक्रियता को भूपेंद्र हुड्डा खेमा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे और उनके समर्थकों ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर तंवर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों का आरोप है कि तंवर अपनी अलग राजनीतिक फौज तैयार कर रहा है। कांग्रेसी सांसद, विधायक व दिग्गजों की अनदेखी के चलते तंवर के नेतृत्व में कांग्रेसी जनाधार तेजी से खिसक रहा है। हुड्डा समर्थकों ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी तक दे डाली है कि यदि नेतृत्व में बदलाव न किया गया, तो हरियाणवी कांग्रेस समाप्त हो जाएगी। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कमलनाथ को भी भूपेंद्र हुड्डा समर्थक कांग्रेसी दिग्गजों ने प्रदेश की कांग्रेस तस्वीर की जानकारी देकर नेतृत्व परिवर्तन की गुहार लगाई है। हुड्डा समर्थकों की दलील है कि पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा पर कार्ड खेला जाता है, तो हरियाणा में भी कांग्रेस ध्वज फहराए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। तंवर की कार्यशैली की बदौलत कांग्रेसीजनों में निराशा देखी जा सकती है, जबकि विपक्षी इनैलो तथा सत्तारूढ़ भाजपा हरियाणवी कांग्रेस के इस आपसी कलह से फायदा उठा रही है। हुड्डा समर्थक कांग्रेसी विधायकों की सुनवाई न होने से उनका त्याग पत्र देने का सिलसिला भी शुरू हो सकता है, जिससे कांग्रेस का एक बड़ा भारी राजनीतिक झटका लग सकता है। दूसरी तरफ तंवर लोकसभा तथा विधानसभा में हुई कांग्रेस की दुर्गति का ठीकरा भूपेंद्र हुड्डा पर दर्ज मुकद्दमों के बढ़ते आंकड़े को हरियाणवी कांग्रेस के लिए नुकसानदायक बता रहे है। तंवर की यह भी दलील है कि भूपेंद्र हुड्डा एक विशेष वर्ग की राजनीति करके अन्य बिरादरियों में कांग्रेस के प्रति नाराजगी पैदा कर रहे है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को दवाब की राजनीति से परहेज करते हुए संगठन की मजबूती के लिए प्रयासरत् नेतृत्व को प्रोत्साहित करना चाहिए, जोकि कांग्रेसीजनों की एक उम्मीद कही जा सकती है।

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