प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर की दूसरी पारी से बदल सकती है हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर - The Pressvarta Trust

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Saturday, April 29, 2017

प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर की दूसरी पारी से बदल सकती है हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर

ashok tanwar
सिरसा(प्रैसवार्ता)। आपसी कलह से जूझ रही हरियाणवी कांग्रेस में अशोक तंवर की दूसरी पारी राजनीतिक तस्वीर में बदलाव ला सकती है, जिसके लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने बकायदा पटकथा तैयार कर ली है। हरियाणा में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से राजनीतिक मतभेद जग जाहिर है। इन्हीं मतभेदों की वजह से भूपेंद्र हुड्डा हरियाणा में समांतर कांग्रेस चला रहे है और हुड्डा समर्थक कांग्रेसी विधायक व दिग्गज अशोक तंवर से दूरी बनाए हुए है। अपने तीन वर्ष की प्रधानगी कार्यकाल में तंवर ने पूरे प्रदेश में जा-जाकर कांग्रेसीजनों को संजीवनी दी है, जबकि भूपेंद्र हुड्डा के समर्थकों ने अशोक तंवर के हर प्रयास में रूकावटें उत्पन्न की है। केवल इतना ही नहीं, तंवर और भूपेंद्र हुड्डा के बीच चल रहे शब्दों की जंग ने हाथापाई व मारपीट का रूप लेकर कांग्रेसीजनों की बेचैनी बढ़ा दी है। संगठन मजबूती के लिए तंवर के प्रयासों और भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों की ओर से इन प्रयासों को विफल बनाने से कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व बड़ी गहराई से ले रहा है। हरियाणवी कांग्रेस की तंवर बनाम हुड्डा की राजनीतिक आँख मिचौली से कांग्रेसीजन की नजरें कांग्रेस हाईकमान के फैसले की इंतजार में है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व यदि तंवर को पुन: ताजपोशी करता है, तो हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर बदल जाएगी, क्योंकि भूपेंद्र हुड्डा की ओर से नेतृत्व परिवर्तन की भ्रमित की पोल खुल जाएगी। हुड्डा ने अपने समर्थकों को भ्रमित कर रखा है कि प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन होकर कमान उनके हाथो में होगी। दूसरी तरफ दूसरी पारी खेलने कके तंवर ने भी प्रयास शुरू कर दिए है और अपनी प्रधानगी कार्यकाल की तीन वर्षीय रिपोर्ट कार्ड हाईकमान तक पहुंचा दी है। तंवर के प्रयासों से कई राजसी दिग्गजों ने अपनी अपनी पार्टियों से अलविदाई लेकर कांग्रेसी ध्वज थामा है, जिससे हरियाणवी कांग्रेस परिवार में वृद्धि हुई है। तंवर ने संगठन की मजबूती के लिए अनथक प्रयास किए, मगर भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों ने उन प्रयासों में बाधाएं उत्पन्न की। इसके बावजूद भी तंवर की पार्टी के प्रति सक्रियता में कोई फर्क नहीं पड़ा, बल्कि राजनीतिक कद में बढ़ौतरी हुई। इससे भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि तंवर की दूसरी पारी से भूपेंद्र हुड्डा को राजनीतिक झटका लग सकता है, क्योंकि हुड्डा समर्थकों का एक बड़ा आंकड़ा तंवर की चौधर को स्वीकार कर सकता है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व हरियाणवी कांग्रेस के इस घमासान पर क्या निर्णय लेता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। हाईकमान के इस निर्णय पर हरियाणवी कांग्रेस की नजरें टिकी हुई है।

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