सरकार-संगठन में उपेक्षा से भाजपा से दूर हो रहा है पंजाबी समुदाय - The Pressvarta Trust

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Saturday, April 1, 2017

सरकार-संगठन में उपेक्षा से भाजपा से दूर हो रहा है पंजाबी समुदाय

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फतेहाबाद(प्रैसवार्ता)। हरियाणा प्रदेश में एक तिमाही आबादी वाले पंजाबी समुदाय ने अपनी अपेक्षा को देखते हुए हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देकर सरकार बना दी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पंजाबी समुदाय का सम्मान बढ़ाते हुए उनके ही समुदाय के मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बना दिया। पंजाबी समुदाय को उम्मीद थी कि उनकी सरकार में उन्हें मान-सम्मान व अधिकार मिलेंगे, मगर पिछले वर्ष जाट आरक्षण आंदोलन ने, जो मान सम्मान पंजाबी समुदाय को दिया, सुनकर रूह कांप उठती है। खट्टर सरकार में पंजाबी समुदाय की हो रही उपेक्षा से इस समुदाय के लोगों का रूझान भाजपा से तेजी से दूर हो रहा है और यह समुदाय राज्य में नए प्लेटफॉर्म की तरफ टकटकी लगाए हुए है। फतेहाबाद व सिरसा पंजाबी बाहुल्य जिले है और इन जिलों में भाजपा संगठन में पंजाबी समुदाय को उचित स्थान नहीं दिया गया, जबकि सरकार में इस समुदाय के जगदीश चौपड़ा को जरूर तव्वजों दी गई थी। सरकार तथा संगठन पर ऐसे चेहरों का कब्जा है, जो पंजाबी समुदाय के लोगों का कोई तव्वजों नहीं देते, जिस कारण भाजपा से जुड़े ज्यादातर पंजाबी समुदाय के राजसी दिग्गजों का भाजपा से मोहभंग हो गया है, मगर उन्हें भविष्य के लिए कोई नया प्लेटफॉर्म नजर नहीं आ रहा। हरियाणवी पंजाबी सभा, जो पूरे प्रदेश में भारी प्रभाव व पहचान रखती है कि प्रदेशाध्यक्ष संत कुमार एडवोकेट (फतेहाबाद) ने भी अपनी पूरी टीम के साथ विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों की मदद की, लेकिन खट्टर सरकार ने उन्हें कोई सम्मान देना उचित नहीं समझा। प्रदेश में नया राजनीतिक प्लेटफॉर्म बनते ही सरकार तथा भाजपा संगठन को पंजाबी समुदाय की अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पंजाबी समुदाय की नारी शक्ति स्वतंत्रबाला चौधरी तथा सुनीता सेतिया को चुनावी समर में उतार दिया है, मगर जीत न सकने पर अनदेखी शुरू करके ऐसे चेहरों को सरकारी सुख उपलब्ध करवा दिया, जो ग्राम में पंच तक नहीं बन सकते। पंजाबी समुदाय स्वयं को सरकार तथा संगठन से ठगा हुआ महसूस करता है। निकट भविष्य में होने वाले चुनाव में पंजाबी समुदाय की क्या भूमिका रहेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। यदि इसी बीच कोई नया राजनीतिक प्लेटफॉर्म हरियाणवी राजनीति के मानचित्र पर उभर कर आता है, तो राज्य की राजनीतिक तस्वीर में जरूर बदलाव दिखाई दे सकता है।

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