अशोक तंवर के हुड्डा प्रति यू टर्न से तंवर समर्थक सकते में

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सिरसा(प्रैसवार्ता)। हिचकोले खा रही हरियाणवी कांग्रेस की तस्वीर में उस समय बदलाव आ गया, जब मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रति नरम तेवर दिखाई दिए।  तंवर की यू-टर्न से हुड्डा समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है, वहीं तंवर समर्थक सकते में आ गए है। हरियाणा में कांग्रेस के अतिरिक्त भूपेंद्र हुड्डा की समांतर कांग्रेस लंबे समय से चल रही है, जिसमें तंवर और हुड्डा समर्थकों ने राजनीतिक दूरी बनाते हुए एक दूसरे के समर्थकों की टांग खिंचाई मुहिम चलाई हुई है। तंवर के यू-टर्न से संकेत मिलता है कि शीर्ष नेतृत्व भूपेंद्र हुड्डा की फौज के दवाब में आ गया है और शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर ही तंवर की ट्यून बदली है। कांग्रेस को पूर्णतया समर्पित कांग्रेसीजन इसे शुभ संकेत मानते है, जबकि भूपेंद्र हुड्डा समर्थक इसे हुड्डा की जीत के रुप में देखते हैं। तंवर समर्थकों की यू-टर्न ने बेचैनी बढ़ा दी है, क्योंकि तंवर समर्थकों ने भूपेंद्र हुड्डा बनाम अशोक तंवर के राजनीतिक मतभेदों पर चलकर हुड्डा समर्थकों से राजनीतिक मतभेदों के साथ-साथ निजी रंजिश भी कायम कर ली थी। काबिलेगौर है कि विधानसभा चुनाव में भूपेंद्र हुड्डा की फौज और तंवर सेना ने एक दूसरे को पराजित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिस कारण कांग्रेस को शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा था। तंवर खेमा इस शर्मनाक पराजय के लिए भूपेंद्र हुड्डा फौज पर फोक्स बनाकर चल रहा था, जबकि भूपेंद्र हुड्डा ने अपने एक दशक के मुख्यमंत्री काल में अपनी फौज तैयार कर ली थी। तंवर ने प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता से अलविदाई उपरांत कांग्रेस संगठन के लिए अनथक प्रयास किए, मगर भूपेंद्र हुड्डा की समांतर कांग्रेस ने तंवर के सभी प्रयासों पर ग्रहण लगा दिया। भूपेंद्र हुड्डा और अशोक तंवर के  राजनीतिक मतभेद शब्दों की जंग से आगे बढ़कर हाथापाई-मारकुटाई तक पहुंच गए। हरियाणा में तेजी से कांग्रेस का ग्राफ कम होने लगा तो शीर्ष नेतृत्व को संज्ञान लेना पड़ा। तंवर के हुड्डा प्रति नरम रवैये से  उनके समर्थकों का हुड्डा समर्थकों के प्रति नरम होना आसान दिखाई नहीं दे रहा। तंवर का  नरम रवैया किसी भी कारण हो गया हो, मगर तंवर समर्थकों के गले से इस बदलाव को नीचे उतारना किसी अग्नि परीक्षा से कम नजर नहीं आ रहा। तंवर का भूपेंद्र हुड्डा के प्रति यू-टर्न उनके समर्थकों को, जहां रास नहीं आ रहा, वहीं हिचकौले खा रही कांग्रेस अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित देखी जाने लगी है।

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