भूपेंद्र सिंह हुड्डा की बढ़ती सक्रियता कांग्रेस पर पड़ सकती है भारी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा के तीखे तेवर और सक्रियता को लेकर क्यास लगाए जाने लगे है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर आर पार की राजनीतिक लड़ाई लडऩे के मूड में है, जिसे हरियाणवी कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। अपने कांग्रेसी अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए पिछले लगभग अढ़ाई वर्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा कई शक्ति प्रदर्शन, शीर्ष नेतृत्व को चेतावनी जैसा राजनीतिक खेल  खेल चुके है, मगर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कोई तव्वजों नहीं दी, बल्कि उनसे राजनीतिक मतभेद रखने वाले डॉ. अशोक तंवर पर ही फोक्स बनाए रखा। प्रदेश में समांतर कांग्रेस चला रहे भूपेंद्र हुड्डा के पास कांग्रेसी दिग्गजों की लंबी फौज है, जो डॉ. तंवर की राह में बाधाएं उत्पन्न करती रहती है, मगर  उन्हें राजनीतिक पटकनी देने में सक्षम नजर नहीं आते। पार्र्टी के संगठन चुनाव में अपने अपने चहेतों की उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए डॉ. अशोक तंवर, भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अतिरिक्त सुश्री शैलजा, किरण चौधरी, रणदीप सुरजेवाला, कैप्टन अजय यादव और कुलदीप बिश्नोई ने दिल्ली दरबार में दस्तक देकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यदि संगठन चुनाव में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की दाल नहीं गल पाती, तो उनके पास अलविदाई के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं रहेगा। यदि हुड्डा कांग्रेस से अलविदाई लेकर नई राजनीतिक दुकान खोल लेते है, तो प्रदेश में कांग्रेस को भारी नुकसान हो सकता है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक निरंतर हुड्डा पर दवाब बनाए हुए है, कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व उन्हें तव्वजों नहीं देता, तो वह कांग्रेस के हाथ का साथ छोड़ दे, मगर एक सुलझे हुए राजनेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रयास जारी है कि तंवर को कांग्रेसी ध्वज के नीचे रखते हुए राजनीतिक झटका दिया जाए। कांग्रेसी दिग्गजों की सक्रियता से सत्तारूढ़ भाजपा व प्रमुख विपक्षी दल इनैलो भी सतर्क हो गई है। अभी प्रदेश के विधानसभाई चुनाव में दो वर्ष से ज्यादा का समय बचा हुआ है, मगर राजनीतिक सक्रियता चुनावी वर्ष जैसा मानचित्र दर्शाती है।

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