हरियाणा के सभी पंजाबी वर्ग संस्थाओं को एक मंच पर लाने के प्रयास शुरू

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा के पंजाबी वर्ग की मौजूदा पंजाबी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से नाराजगी के चलते पंजाबी वर्ग से संबंधित विभिन्न विभिन्न संस्थाओं के प्रभावी दिग्गजों ने पंजाबी वर्ग को एक मंच पर लाने की कवायद शुरू कर दी है और निकट भविष्य में सभी पंजाबी वर्ग की संस्थाओं के प्रतिनिधि एक मंच पर दिखाई दे सकते है। वर्तमान में प्रदेश के प्रभावी पंजाबी वर्ग के प्रतिनिधि संत कुमार एड़वोकेट, श्याम मेहता, राधा नरूला, बलबीर शाह पाल, सुभाष बत्रा, विनोद भ्याणा, अनिल भाटिया, रामनाथ आहुजा, सुभाष सुधा, अश्विनी चौपड़ा, नंद किशोर चावला, अशोक मेहता, राधेश्याम, कस्तूरी लाल, आहूजा, एसी चौधरी, महेश डाबर, मनीष ग्रोवर, बक्शीश सिंह विर्क, अमीरचंद मक्कड़, लक्ष्मणदास अरोड़ा, राहुल सेतिया, मलिक कृष्ण लाल, ओमप्रकाश महाजन, लीलाकृष्णा चौधरी इत्यादि को पंजाबी वर्ग की वकालत करने के लिए जाना जाता है, मगर इनमें  से ज्यादातर इस नश्वर संसार से अलविदाई ले चुके है, जबकि कुछ निष्क्रिय होकर रह गए है। भाजपाई सांसद अश्विनी चौपड़ा, प्रदेश के राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर, संत कुमार एडवोकेट आज भी पंजाबी वर्ग की वकालत कर रहे है। अश्विनी चौपड़ा और मनीष ग्रोवर सत्ता के साथ होने के बावजूद भी पंजाबी वर्ग को मान-सम्मान और उनके अधिकार नहीं दिलवा पा रहे है, जबकि  प्रदेश के मुख्यमंत्री भी पंजाबी वर्ग से ताल्लुक रखते है। जाट आरक्षण आंदोलन दौरान पंजाबी वर्ग के साथ जो ज्यादती हुई है, उसे देखकर पंजाबी वर्ग की मुख्यमंत्री के प्रति नाराजगी देखी जा सकती है। प्रदेश की एक तिहाई आबादी वाले पंजाबी वर्ग के बुद्धिजीवियों ने सभी संस्थाओं को एक मंच पर लाने की शुरूआत कर दी है। पिछले चार दशक से पंजाबी वर्ग के हितों के लिए संघर्षरत् अधिवक्ता, संत कुमार एडवोकेट फतेहाबाद को फोक्स मानते हुए सभी पंजाबी वर्ग के दिग्गजों ने एकजुटता के लिए कदम बढ़ा दिए है, क्योंकि पंजाबी वर्ग के लिए सबसे ज्यादा प्रयास संत कुमार एडवोकेट के ही माने जा सकते है। पंजाबी वर्ग की पटकथा लिखने वाले संत कुमार एडवोकेट की पुस्तक जद्दोजहद को इस वर्ग ने ग्रंथ के रूप में स्वीकार कर लिया है। प्रदेशभर का पंजाबी वर्ग एक मंच पर एकजुट हो पाएगा। यह कहना तो कठिन है, मगर एकजुटता के प्रयास जरूर  सराहनीय कहे जा सकते है।

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