भाजपा का सिरसा रोहतक पर फोक्स बदल सकता है राजनीतिक मानचित्र

सिरसा(प्रैसवार्ता)। भाजपा मिशन 2019 को लेकर हरियाणा में भाजपा द्वारा  सिरसा तथा रोहतक संसदीय क्षेत्र को फोक्स बनाकर बढ़ाई गई सक्रियता से हरियाणवी राजनीति के मानचित्र में बदलाव के आसार नजर आने लगे है। मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहर लाल खट्टर द्वारा लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव का संकेत देने से राज्य में राजनीतिक सरगर्मियों में उबाल आ गया है। वर्तमान में राज्य के प्रमुख विपक्षी दल इनैलो की राजनीति विशेषज्ञों की पहुंच से बाहर है, जबकि हरियाणा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर और समांतर कांग्रेस चला रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जनसभाओं की बाढ़ आई हुई है। भाजपा इनैलो से तालमेल की संभावना को मानते हुए तंवर को सिरसा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को रोहतक संसदीय क्षेत्र में घेरने की योजना को अमलीजामा पहनाए जाने की फिराक में है। कांग्रेस के आपसी कलह का लाभ उठाने का ख्वाब पाले हुए भाजपा का सिरसा तथा रोहतक संसदीय क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सिरसा तथा रोहतक  के प्रति उमड़े स्नेह से चर्चाएं शुरू हो गई है कि खट्टर भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में सिरसा या रोहतक से अपना राजनीतिक भविष्य अजमा सकते है। अमित शाह का तीन दिवसीय रोहतक प्रवास भूपेंद्र हुड्डा के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता, वहीं खट्टर का सिरसा प्रेम अशोक तंवर पर भारी पड़ सकता है। सिरसा का डेरा सच्चा सौदा राजनीतिक प्रकोष्ठ पहले ही भाजपा पक्षीय है, वहीं डेरा बाबा भूमणशाह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर 31 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। मुख्यमंत्री सितंबर मास में सिख समुदाय के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह के 350वें प्रकाश उत्सव पर सिरसा में हो रहे राज्यस्तरीय कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने आ रहे है। अग्रवाल वैश्य समाज में भाजपाई विधायक उमेश अग्रवाल पहले ही दस्तक दे चुके है, जबकि सिरसा में ही पंजाबी महासम्मेलन की रूपरेखा बनाई जा रही है। खट्टर समर्थकों द्वारा सिरसा को ही तव्वजों दी जा रही है, क्योंकि सिरसा विधानसभा के राजनीतिक इतिहास में मात्र दो बार छोड़कर पंजाबी या अग्रवाल वैश्य समाज का ही प्रतिनिधित्व रहा है। रोहतक में ऐसी ही राजनीतिक तस्वीर है, मगर जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पंजाबी समुदाय को दिए गए घाव अभी भरे नहीं है। इस रणनीति के तहत भाजपा भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा तंवर को राजनीतिक पटकनी भी दे सकती है।

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