कांग्रेस के संगठन चुनाव पर लग सकता है ग्रहण

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सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा कांग्रेस के दो दिग्गजों के आपसी राजनीतिक मतभेदों से जहां कांग्रेसीजन सकते में है, वहीं पार्टी के संगठनात्मक चुनाव पर ग्रहण लगने के आसार दिखाई देने लगे है। हरियाणवी कांग्रेस में सदस्यता विवाद ने कांग्रेस हाईकमान को उलझाया हुआ है, जिसे सुलझाने के लिए शीर्ष नेतृत्व के सभी प्रयास विफल हो गए है। काबिलेगौर है कि प्रदेश में संगठनात्मक चुनावों की प्रक्रिया सितंबर मास के अंत तक पूरी की जानी है, मगर सदस्यता विवाद को लेकर मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर तथा समांतर कांग्रेस चला रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक आमने सामने है। हुड्डा समर्थकों का आरोप है कि प्रदेश व जिलास्तर पर नियुक्त चुनाव अधिकारी अशोक तंवर के विश्वासपात्र है, ऐसी स्थिति में पारदर्शिता ढंग से चुनाव नहीं हो सकते। आरोप यह भी है कि हुड्डा समर्थकों को सदस्यता सूचियों में शामिल नहीं किया गया है। दोनो गुटों में बढ़ रहे विवाद की दस्तक दस जनपथ तक हो चुकी है, जिस पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर हरियाणा प्रभारी मधुसूदन ने दोनो गुटों के नेताओं को दिल्ली तलब किया है। दिल्ली दरबार भी यदि सत्यता विवाद  मिटाने में कामयाब हो जाता है, तो संगठनात्मक चुनावों पर ग्रहण लग सकता है, ऐसा राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है। तंवर का अध्यक्ष कार्यकाल फरवरी महीने में ही समाप्त हो गया था, मगर अब हरियाणवी कांग्रेस की कमान उनके ही हाथ में है। प्रदेश के कांग्रेसी मानचित्र को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने पहले की तरह ही प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त करने की बजाए संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया को तव्वजों दी थी, जो अधर में लटकती नजर आ रही है। हुड्डा समर्थक एक लंबे समय से तंवर का नेतृत्व स्वीकार नहीं कर रहे, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन का राग अलाप रहे है, जिसका शीर्ष नेतृत्व पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय द्वारा सदस्यता सूचियों के आधार पर यदि संगठनात्मक चुनाव करवाए जाते है, तो तंवर की लॉटरी खुल सकती है, जिसे हुड्डा समर्थकों के लिए शुभ संकेत कहा जा सकता है। प्रदेश के कांग्रेसीजनों की नजरें हरियाणा कांग्रेस प्रभारी मधु सुदन की ओर से बुलाई गई बैठक पर लगी हुई है। यदि इस बैठक में सदस्यता विवाद का कोई समाधान नहीं निकलता, तो संगठन चुनावों पर ग्रहण लग सकता है।

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