डेरा सच्चा सौदा प्रमुख प्रकरण से हरियाणवी राजनीति में हडकंप

सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को सीबीआई अदालत की ओर से साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा के साथ ही हरियाणवी राजनीति में हडकंप मच गया है, क्योंकि डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक विंग की हरियाणवी राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका पिछले लंबे समय से चली आ रही है। हरियाणा के अस्तित्व में आने के बाद 50 वर्ष के बाद पहली बार भाजपा ने स्पष्ट बहुमत लेकर सरकार बनाई है, जिसमें डेरा सच्चा सौदा के राजनीतिक विंग का अहम् योगदान रहा है। डेरा सच्चा सौदा के भाजपा समर्थन को लेकर भाजपाई शासन बनने पर तीन दर्जन से ज्यादा भाजपाई विधायकों ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के समक्ष नतमस्तक होकर आभार व्यक्त किया था। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वर्ष 2014 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में टोहाना, हिसार, अंबाला शहर, उचानाकलां, नारनौंद, भिवानी, बुवानीखेड़ा, पिहोवा, मुलाना, शाहबाद, थानेसर, लाड़वा इत्यादि क्षेत्रों के भगवा विजयी परचम में डेरा के राजनीतिक विंग का निर्णायक योगदान रहा है। डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय सिरसा होने के बावजूद भी संसदीय क्षेत्र सिरसा के 9 विधानसभा क्षेत्रों में से एक पर ही भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली थी। डेरा प्रमुख राम रहीम को हुई सजा को लेकर  डेरा समर्थकों में निराशा का आलम देखा जाने लगा है, क्योंकि डेरा की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू हो चुकी है। बाबा राम रहीम को हुई सजा के बाद डेरा प्रेमियों का भाजपा सरकार से मोह भंग होना शुरू हो गया है, जिसे भाजपा के मिशन 2019 के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। काबिलेगौर है कि 11 अक्टूबर 2014 को डेरा सच्चा सौदा के वोट बैंक में सेंधमारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डेरा सच्चा सौदा के पक्ष में गुणगान किया था। वर्तमान में खुफिया तंत्र के डेरा प्रेमियों पर नजर रखने के चलते डेरा प्रेमी भाजपा सरकार से खफा है, क्योंकि प्रशासनिक तंत्र का भय उनके सिर पर मंडराने लगा है। डेरा प्रेमियों की मौजूदा स्थिति पर कांग्रेस चुप्पी साधे हुए है, जो भाजपा से हो रहे मोहभंग पर राजनीतिक लाभ उठाने की फिराक में है। डेरा प्रमुख को सजा से भाजपाईयों में बेचैनी का आलम है, तो कांग्रेस हसीन सपनें देख रही है।

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