हरियाणा में भाजपा मिशन 2019 को लग सकता है ग्रहण

सिरसा(प्रैसवार्ता)। गुरुग्राम निगम चुनाव परिणाम स्पष्ट संकेत देते है कि हरियाणा में भाजपा मिशन 2019 पर ग्रहण लग सकता है, क्योकि कांग्रेस की तर्ज पर भाजपा हरियाणा चल पड़ी है। इस निगम में प्रभावशाली भाजपाई दिग्गजों को चुनावी समर में न उतारना और चुनाव लड़ रहे दिग्गजों के प्रत्याशियों को पराजय माला पहनाई है। दस संसदीय क्षेत्रों वाले हरियाणा में सात भाजपा से है, मगर इनमें से आधे से ज्यादा मौजूदा भाजपा सरकार से खफा है, जबकि 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में भाजपा के 47 विधायक है। इन भाजपाई विधायकों में से डेढ़ दर्जन से ज्यादा सरकार से असंतुष्ट है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व खुफिया तंत्र के सर्वे अनुसार वर्तमान में चुनाव होने की स्थिति में भाजपा 20 से  कम क्षेत्रों में भगवा फहराने में सक्षम कही जा सकती है। हरियाणा की तरह कई प्रदेशों में भाजपा हिचकोले खा रही है। ऐसी स्थिति में भाजपा के 350 के लक्ष्य पर प्रश्र चिह्न लग सकता है। देश के पांच राज्यों के 164 संसदीय क्षेत्रों में मात्र सात पर भाजपाई सांसद है। मई 2014 को हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा हरियाणा का जनहित कांग्रेस, एमडीएम, स्वामीनाथन पक्ष, अपना दल, डीएमडीके, पीएमके, लोक जन शक्ति पार्टी, पीडीपी शिव सेना और शिरोमणी अकाली दल से गठबंधन था। हजकां का अब कांग्रेस में विलय हो चुका है, जबकि शिरोमणी अकाली  दल सत्ता से बाहर है। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार में भाजपा के जनाधार में काफी कमी आई है। बिहार में बदलती परिस्थिति ने राजनीतिक तस्वीर बदल दी है। भाजपा का मिशन 2019 देशभर  में क्या करिश्मा दिखाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर हरियाणा में मिशन 2019 भाजपा को राजनीतिक घाव देगा, ऐसा राजनीतिक पंडित मानकर चल रहे है। सांसद धर्मवीर लोकसभा चुनाव लडऩे से इंकार कर चुके है, जबकि भाजपाई सांसद अश्विनी चौपड़ा सार्वजनिक रूप से भाजपा  सरकार पर तीखे प्रहार करते है। सांसद राजकुमार सैनी अपनी अलग-अलग डफली बजाकर क्षेत्रीय दल के गठन की तैयारी कर रहे है। अंबाला सांसद रतनलाल कटारिया भी लोगों के काम न करवा पाने के चलते संसदीय क्षेत्र से दूरी बनाए हुए है। गुरुग्राम भाजपाई सांसद राव इंद्रजीत के भाजपाई शासन के प्रति बगावती तेवर जग जाहिर है। इसी प्रकार डेढ़ दर्जन से ज्यादा भाजपाई विधायक मतदाताओं की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के चलते क्षेत्र के लोगों से दूरी बनाने को ही तव्वजों दिए हुए है। हरियाणा भाजपा की मौजूदा तस्वीर दर्शाती है कि भाजपा के मिशन 2019 को हरियाणा से नुकसान उठाना पड़ेगा। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व हरियाणा के राजनीतिक मानचित्र को गंभीरता से देख रहा है और इस रणनीति का मंथन भी कर रहा है कि प्रदेश का नेतृत्व तथा संगठन में बदलाव किया जाए अथवा नहीं, क्योंकि बदलाव से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने के आसार कम है।

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