डेरा का वोट बैंक थामे रखना किसी चुनौती से कम नही रहेगा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। डेरा सच्चा सौदा के राजनीतिक प्रकोष्ठ के खुले समर्थन से सत्ता में आई भाजपा हरियाणा के लिए डेरा प्रमुख प्रकरण उपरांत वोट बैंक को थामे रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि इस प्रकरण से डेरा प्रेमियों की आस्था भाजपा के प्रति कम होने लगी है। ज्यादातर प्रेमी पुन: मुख्यधारा से जुडऩे शुरू हो गए है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने धर्म प्रचार लहर शुरू कर दी है, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी कमान संभाल ली है। सन् 2014 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक विंग के खुले समर्थन से भाजपा ने 35 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल कर 47 विधानसभा क्षेत्रों में जीत के साथ भाजपा सरकार बनाई थी, जबकि वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 4 पर ही जीत मिली थी और भाजपा का वोट 9.04 प्रतिशत रहा था। डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक विंग के भाजपा समर्थन को लेकर आरएसएस की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है, जो प्रदेश के ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में डेरा समर्थकों की स्थिति से वाकिफ हो चुका था। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के जेल जाने के बाद भाजपा, संघ के साथ साथ कांग्रेस की भी डेरा वोट बैंक को लेकर सक्रियता बढ़ गई है। डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय सिरसा है। हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर भी संसदीय क्षेत्र सिरसा का प्रतिनिधित्व कर चुके है। तंवर की स्थायी रिहाईश सिरसा में है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि डेरा प्रमुख राम रहीम को सीबीआई अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद अब डेरा सच्चा सौदा के राजनीतिक विंग को भी झटका लगेगा और फतवा जारी करने की पुरानी परंपरा भी प्रभावित होगी। डेरा प्रमुख प्रकरण ने भाजपाई मिशन 2019 पर ग्रहण लगा दिया है। वैसे भी डेरा के समक्ष संकट की स्थिति को देख कर ऐसा नहीं लगता कि आगामी किसी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में डेरा राजनीतिक विंग किसी दल के समर्थन में खुला फरमान जारी कर पाएगा। भाजपा सरकार द्वारा डेरा प्रमुख प्रकरण में ढिलमुल की प्रक्रिया बनरई गई है, मगर डेरा प्रेमियों  में पनपा रोष भाजपा के प्रति सहानुभूति बनाये रखेगा, यह तो आने वाला समय ही बता सकता है।

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