इनैलो की भिवानी रैली से शुरू होगी गढ़ वापसी की तैयारी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पूर्व उप मुख्यमंत्री स्व. चौधरी देवीलाल के जन्मदिवस पर भिवानी में होने वाली रैली पर भाजपा तथा कांग्रेस की नजरें टिक गई है, क्योंकि इस रैली की सफलता के साथ इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले झज्जर, सोनीपत, रोहतक व भिवानी में इनैलो की चहल पहल बढ़ जाएगी। वर्तमान में हरियाणा के इन चार जिलों में कांग्रेस, भाजपा तथा इनैलो का कोई ऐसा प्रभावी दिग्गज नहीं है, जो इन जिलों को नेतृत्व दे सके। इनैलो नेता अभय चौटाला की चौधरी देवीलाल के इस गढ़ में इनैलो की विजयी पताका फहराने की योजना की शुरूआत भिवानी रैली से की जा रही है, जिसे सफल बनाने के लिए इनैलो नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है। यह पहला अवसर होगा कि इनैलो की इस रैली में किसी भी पार्टी से कोई भी दिग्गज अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाएगा। करीब 13 वर्ष से सत्ता से दूर रहने वाली इनैलो पार्टी को उस समय गहरा झटका लगा था, जब इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला व इनैलो के युवा कमांडर अजय चौटाला को जेबीटी भर्ती घोटाला में दस-दस वर्ष की सजा अदालत ने सुनाई थी। इनैलो को मिले इस झटके से ऐसे आसार नजर आने लगे थे कि इनैलो धीरे-धीरे राजनीतिक हाशिये से लुप्त हो जाएगी, मगर ऐसा नहीं हुआ। इनैलो के जुनियर कमांडर अभय चौटाला ने पार्टी की कमान संभाल कर इनैलो दिग्गजों व समर्थकों को साथ लेकर संघर्ष जारी रखा। हिचकोले खा रही इनैलो को उस समय भारी राहत मिली, जब मोदी लहर के बावजूद भी इनैलो के युवा सिपाही दुष्यंत चौटाला ने हिसार संसदीय क्षेत्र से विजयी परचम लहराकर लोकसभा में दस्तक दी। इनैलो के कभी गढ़ रहे चार जिलों पर फोक्स बनाकर अभय चौटाला ने भिवानी रैली का, जो कार्ड खेला है, उससे भूपेंद्र  हुड्डा पूर्व सीएम हरियाणा की बेचैनी बढ़ी है। भूपेंद्र हुड्डा की बदौलत इनैलो का झज्जर, रोहतक व सोनीपत में खाता नहीं खुला, जबकि भिवानी जिले के दादरी विधानसभा क्षेत्र में ही इनैलो प्रत्याशी को जीत मिली। इनैलो द्वारा एसवाईएल मुद्दे को लेकर छेडी गई जंग से काफी फायदा हुआ है। अपने पुराने गढ़ में वापसी के लिए अभय चौटाला, सांसद दुष्यंत चौटाला तथा दिग्विजय चौटाला ने चारो जिलों की कमान संभाली रखी है और भिवानी रैली में इन चार जिलों से ही ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाई जाएगी। इनैलो के इस संभावित फोक्स से बेचैन कभी विरोधी रहे राव इंद्रजीत ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी है, ताकि इनैलो के इस राजनीतिक झटके से बचाव की कोई रणनीति बनाई जा सके।

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