हरियाणा मंत्रीमंडल में फेरबदल के बने आसार: कई भाजपाई दिग्गजों की खुल सकती है लॉटरी - The Pressvarta Trust

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Wednesday, September 6, 2017

हरियाणा मंत्रीमंडल में फेरबदल के बने आसार: कई भाजपाई दिग्गजों की खुल सकती है लॉटरी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। केंद्रीय मंत्रीमंडल के विस्तार उपरांत हरियाणा में फेरबदल की संभावनाओं ने कई भाजपाई दिग्गजों की धड़कने बढ़ा दी है और उन्होंने अपनी कुर्सी को बचाये रखने के लिए दिल्ली दरबार में दस्तक दी है। चर्चा है कि इस फेरबदल में कई मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते है, जबकि कई निगमों तथा बोर्डों के चेयरमैन पर गाज गिर सकती है। जिला सिरसा के पांच विधानसभाई क्षेत्रों में भाजपा का एक भी विधायक नहीं है, मगर जिलास सिरसा से पांच निगम व बार्डों के चेयरमैन है। ऐसे चेयरमैनों में जगदीश चौपड़ा, रेणू शर्मा, पवन बैनीवाल, कुमुद बांसल व गुरदेव सिंह राही भी शामिल है। बैनीवाल को छोड़कर किसी ने भी वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा, जबकि विधानसभा में भाजपा के प्रत्याशी रहे जगदीश नेहरा, देव कुमार शर्मा, राजेंद्र देसूजोधा तथा सुनीता सेतिया को कोई सरकारी चौधर नहीं दी गई। कुमुद बांसल कभी सक्रिय भाजपाई नहीं रही, तो गुरदेव राही कई विवादों में चर्चित है। जिला सिरसा के भाजपाई चौधरियों को सरकार चलाने का अनुभव बिलकुल नहीं है, जिस कारण जिला भर में भाजपाईयों की नाराजगी के साथ साथ जनाधार में भी गिरावट आई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के हरियाणा के तीन दिवसीय प्रवास दौरान सरकार तथा संगठन की फीड बैक बाद शाह की टिप्पणी से संकेत मिलते है कि सरकार तथा संगठन में बदलाव की जरूरत शीर्ष नेतृत्व महसूस कर रहा है। संभावित फेरबदल को लेकर भाजपाई दिग्गजों में कुर्सी हथियाने की दौड शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश उपरांत मुख्य संसदीय सचिव से अलग हुए बक्शीश सिंह विर्क, कमल गुप्ता, श्याम राणा, सीमा त्रिखा तथा सीएम के पूर्व सलाहकार जगदीश चौपड़ा की लॉटरी खुलने की ज्यादा संभावनाएं नजर आ रही है। सिख पंथ के दसवें गुरु गोबिंद सिंह के तीन सौ वर्षीय राज्यस्तरीय कार्यक्रम सिरसा में आयोजन की जिम्मेवारी जगदीश चौपड़ा दिए जाने से क्यास लगाया जा रहा है कि चौपड़ा को बड़ी जिम्मेवारी मिल सकती है, जबकि सिरसा में संबंधित एक या दो चेयरमैन हटाए भी जा सकते है। अमित शाह द्वारा रोहतक में मनोहर लाल को दी गई क्लीन चिट और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर मनोहरलाल पर दिखाए गए विश्वास से संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है और न ही पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के स्थान पर किसी अन्य भाजपाई दिग्गज की ताजपोशी की संभावना है।

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