रणजीत सिंह के यूटर्न से भूपेंद्र हुड्डा-रणजीत समर्थक सकते में

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पूर्व उप प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल के बेटे तथा पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विश्वासपात्र व रणनीतिकार रणजीत सिंह की कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर से मुलाकात व लंबी मंत्रणा उपरांत जिला की राजनीति में क्यासों की बाढ़ आ गई है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा व रणजीत सिंह के समर्थक सकते में आ गए है। रणजीत सिंह का जिला सिरसा में एक निजी वोट बैंक कहा जा सकता है, जो रणजीत सिंह के बदलते राजनीतिक चरित्र के साथ ही धीरे धीरे बदल रहा है। रणजीत सिंह वर्ष 1987 में चौधरी देवीलाल लहर में विधायक बने थे। अपने लगभग तीन दशक के राजनीतिक जीवन में रणजीत सिंह ने आधा दर्जन से ज्यादा चुनावों में अपना भाग्य अजमाया, मगर सफल नहीं हो पाए। शाईनिंग इंडिया की चमक से रणजीत सिंह ने भगवा ध्वज भी उठाया था,मगर जल्द ही उन्होंने भाजपा को अलविदा कह दिया। भजनलाल सरकार में रणजीत सिंह तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल के करीबी रहे और भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार में उन्हें योजना बोर्ड का उपाध्यक्ष पद से नवाजा गया। हरियाणवी राजनीति में रणजीत सिंह को भूपेंद्र सिंह हुड्डा का करीबी माना जाता रहा है, मगर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक विरोधी अशोक तंवर की मंत्रणा ने हुड्डा तथा रणजीत सिंह समर्थकों में बेचैनी बढ़ा दी है, क्योंकि ज्यादातर राजसी दिग्गजों ने रणजीत सिंह के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए अयाोक तंवर से राजनीतिक दूरी बनाए हुई थी। भूपेंद्र हुड्डा की जिला सिरसा में दस्तक के लिए रणजीत सिंह ने जनसभा की भी हुंकार भरी थी, मगर जनसभा नहीं हो पाई। रणजीत सिंह के तीन दशक के राजनीतिक इतिहास में चढ़ते सूरज को ही सलाम दिया जाता रहा है। तंवर से मुलाकात और लंबी मंत्रणा से संकेत मिलता है कि तंवर हरियाणवी राजनीति का चढ़ता सूरज है। रणजीत सिंह के यूटर्न से उनके समर्थकों में मची खलबली से उनके निजी वोट बैंक में बिखराव के आसार दिखाई देने लगे है।

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