भाजपा हरियाणा के स्वपन पर भारी पड़ सकती है कांग्रेसी त्रिवेणी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी कांग्रेस में आपसी कलह के बावजूद भी प्रदेश में कांग्रेसी पलड़ा भारी नजर आ रहा है, जो भाजपा हरियाणा के राजनीतिक स्वपन पर भारी पड़ सकता है। भाजपा का जनाधार प्रदेश में तेजी से कम हो रहा है, वहीं कांग्रेसी त्रिवेणी तंवर, शैलजा और किरण चौधरी की एकजुटता के साथ सक्रियता से कांग्रेसी संगठन मजबूत होता देखा जाने लगा है। कांग्रेस की इस त्रिवेणी से भाजपा चिंतित है, क्योंकि इस कांग्रेसी त्रिवेणी के दिग्गजों में से किसी पर भी किसी प्रकार का आरोप नहीं है, बल्कि हरियाणा में  समांतर कांग्रेस चला रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा से राजनीतिक मतभेद जग जाहिर है। भूपेंद्र हुड्डा कई संगीन मामलों की जांच के घेरे में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजनीतिक प्रेम की बदौलत जांच की गति काफी धीमी है। कांग्रेस पूरे देश में बगावती हिचकोलों से जूझ रही है, जबकि कई राज्यों में कांग्रेसी कलह सड़कों पर है। ऐसे राज्यों की पंक्ति में हरियाणवी कांग्रेस भी शामिल है, जहां कांग्रेस के साथ साथ समांतर कांग्रेस भी कांग्रेसी चालीसा पढ़ रही है। भाजपा को सत्ता तक पहुँचाने में हरियाणा के कांग्रेसी दिग्गजों का आपसी कलह तथा डेरा सच्चा सौदा के राजनीतिक विंग की अहम् भूमिका रही है, मगर  डेरा सच्चा सौदा के राजनीतिक प्रकोष्ठ को ग्रहण लग गया है। कांग्रेसी दिग्गज एक मंच पर देखे जाने लगे है। कांग्रेस से ज्यादातर दिग्गजों ने मौजूदा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के नेतृत्व में संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है। भाजपा के लिए उनके अपने सांसद, विधायक व दिग्गज बेचैनी बढ़ाए हुए है, जो मौजूदा नेतृत्व से खफा है। राज्य में कांग्रेस, जहां आपसी कलह से उभर रही है, वहीं भाजपा में नाराज दिग्गजों के आंकड़े में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए हरियाणा में भाजपा के लिए दूसरी पारी का स्वपन देखना मुंगेरी लाल के हसीन सपने जैसे कहा जा सकता है। कांग्रेस त्रिवेणी की सक्रियता तथा भाजपाई दिग्गजों की नेतृत्व से नाराजगी भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भारी पड़ सकती है, ऐसी संभावनाएं बनने लगी है।

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