आसान नहीं है हरियाणा में भाजपा की दूसरी पारी - The Pressvarta Trust

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Monday, October 23, 2017

आसान नहीं है हरियाणा में भाजपा की दूसरी पारी

प्रैसवार्ता न्यूज: सिरसा, 23 अक्टूबर। ज्यों-ज्यों हरियाणा विधानसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, त्यों-त्यों कई मौजूदा भाजपाईयों की धड़कने बढ़ रही है। 90 विधानसभा वाली हरियाणा विधानसभा में भाजपा के 47 विधायक हैं, मगर इनमें से ज्यादातर विधायकों को अपने राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडराते दिखाई देने लगे है। राज्य के दस संसदीय क्षेत्रों में से सात पर भाजपा का प्रतिनिधित्व है, जिनमें से फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में भाजपाई नाव हिचकोले खा रही है, क्योंकि इन क्षेत्रों के सांसदों को अपनी ही सरकार के प्रति नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कुरुक्षेत्र के सांसद रामकुमार सैनी के बगावती तेवर जगजाहिर है, तो भिवानी महेंद्रगढ़ के भाजपाई सांसद धर्मवीर प्रदेश की भाजपा सरकार से खफा है। करनाल संसदीय क्षेत्र से भाजपाई सांसद अश्विनी चौपड़ा के बागी तेवर तथा अंबाला के सांसद रतनलाल कटारिया की मतदाताओं तथा भाजपाई कार्यकर्ताओं से दूरी को भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। हरियाणा के लगभग डेढ़ दर्जन भाजपा विधायक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपना राजनीतिक दुखड़ा सुना चुके है। अपनों की नाराजगी से जूझ रहे भाजपाई विधायकों पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख प्रकरण ने गहरी राजनीतिक चोट दी है। हरियाणा के करीब 20 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां डेरा प्रेमियों की निर्णायक भूमिका कही जा सकती है। पिछले विधानसभा चुनाव में डेरा प्रेमियों ने खुला समर्थन भाजपा को दिया था, मगर वर्तमान की तस्वीर बदली हुई है। डेरा प्रमुख को साध्वी यौन शोषण मामले में 20 वर्ष की सजा हो चुकी है, जबकि डेरा से जुड़े ज्यादातर लोगों पर पुलिसिया तंत्र की कार्रवाई की जा रही है। डेरा प्रेमियों की धरपकड़ का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है। भाजपा के विधायकों द्वारा डेरा समर्थकों पर कार्रवाई को लेकर शीर्ष नेतृत्व के समक्ष नाराजगी का इजहार किया जा चुका है। प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर और खुफिया तंत्र के सर्वे से चिंतित भाजपा ने जिलास्तर पर कोर ग्रूप बनाने, पुराने तथा सक्रिय कार्यकर्ताओं को तव्वजों देने की रणनीति तैयार की है। जिलास्तर के कोर ग्रूप अपने जिला के राजनीतिक, सामाजिक, विकास व अन्य मुद्दों पर निर्णय लेने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री हरियाणा कई बार सार्वजनिक तौर पर संकेत दे चुके है कि विधानसभा के चुनाव लोकसभा के साथ हो सकते है। भाजपा ने राज्य में किस-किस भाजपाई चेहरे के पास स्मार्टफोन है कि जानकारी एकत्रित कर रही है, ताकि सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र तथा प्रदेश सरकार की अधिकतम योजनाओं और विजन को उन तक पहुँचाया जा सके। सरकार की मिशन 2019 को लेकर किए जा रहे प्रयास सफल होते नजर नहीं आते, क्योंकि भाजपा में कांग्रेसी कलह से ज्यादा राजनीतिक कलह है, जिसके चलते हरियाणा में भाजपा की दूसरी पारी को आसान नहीं माना जा सकता।

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