पंजाबी समाज को नेतृत्व की तलाश हरियाणा में

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी राजनीति में पंजाबी समुदाय के मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी हरियाणा के पंजाबी समुदाय को ऐसे नेतृत्व की तलाश है, जिसका नजरिया कांग्रेस पक्षीय हो। प्रदेश में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री पंजाबी समुदाय से संबंधित है, मगर प्रदेश का पंजाबी समुदाय मौजूदा भाजपाई शासन से संतुष्ट नहीं है। पंजाबी समुदाय की चौधर के चलते इस समुदाय को उम्मीद थी कि उनका मान सम्मान बढ़ेगा, उनके अधिकार मिलेंगे और उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होगा, मगर हुआ इसके विपरित। जाट आरक्षण आंदोलन की चपेट में सबसे ज्यादा नुकसान पंजाबी समुदाय को झेलना पड़ा। अपने समुदाय की अनदेखी से भाजपाई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी वाकिफ है, जो चाहकर भी पंजाबी समुदाय की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहे। हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दल इनैलो का जाट आरक्षण की खुली वकालत से पंजाबी समाज का इनैलो से मोहभंग हो चुका है। राज्य की इस राजनीतिक तस्वीर से संकेत मिलता है कि पंजाबी समुदाय के समर्थन के बगैर भाजपा, इनैलो या कांग्रेस सत्ता की सीढ़ी तक नहीं पहुँच सकती। हरियाणा में पंजाबी दिग्गजों की कमी नहीं है, मगर राजनीतिज्ञों षडयंत्रों ने इस समुदाय को उभरने ही नहीं दिया। भजनलाल सरकार में पंजाबी समुदाय के विधायकों का आंकड़ा एक दर्जन से ज्यादा था। भूपेंद्र हुड्डा के एक दशक के मुख्यमंत्री काल में इस समुदाय को ऐसे मोड पर लाकर खडा कर दिया कि कांग्रेस के पास एक भी पंजाबी समुदाय का विधायक नहीं। भूपेंद्र हुड्डा की राजनीतिक सोच की बदौलत पंजाबी समुदाय कांग्रेस से दूरी बनाकर भाजपा की तरफ चला गया। भाजपा में पंजाबी समुदाय की अनदेखी से इस समुदाय का रूझान कांग्रेस पक्षीय हो रहा है, जहां कोई भी पंजाबी नेता नहीं है, जिसे कांग्रेस हाईकमान तव्वजों दे रहा हो। हरियाणवी कांग्रेस में चौधर की लड़ाई जाट व दलित नेता के बीच घूमती देखी जाने लगी है, जबकि बगैर पंजाबी समुदाय की मदद से कोई भी चौधरी नहीं बन सकता। कांग्रेस में महिला नेत्री रंजीता मेहता, बुल्लेशाह, अनिल ठक्कर, भूपेश मेहता तथा भारत भूषण बत्तरा जैसे कई युवा चेहरे है, जो पंजाबी समुदाय को नेतृत्व देने में सक्षम है। कांग्रेस यदि हरियाणा के मौजूदा राजनीतिक मानचित्र का अध्ययन करके पंजाबी समुदाय को तव्वजों देती है, तो फायदा मिल सकता है, क्योंकि इनैलो की जाट वर्ग की वकालत तथा भाजपा का इस समुदाय के उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के चलते इस वर्ग का रूझान कांग्रेस पक्षीय नजर आने लगा है।

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