दलित महापंचायत को लेकर दलित समाज उलझन में

सिरसा(प्रैसवार्ता)। 26 नवंबर को संसदीय क्षेत्र सिरसा के शहर फतेहाबाद में होने वाली दलित महापंचायत को कामयाब बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के  समर्थक  मौजूदा, पूर्व सांसद व विधायकों के अतिरिक्त कांग्रेसी दिग्गजों ने मोर्चा संभाल लिया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के मौजूदा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर से छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। डॉ. तंवर दलित समुदाय से संबंधित होने के साथ साथ संसदीय क्षेत्र सिरसा का प्रतिनिधित्व भी कर चुके है और संसदीय क्षेत्र में प्रभावी रसूख रखते है। डॉ. तंवर की शीर्ष नेतृत्व कांग्रेस पर मजबूत पकड तथा प्रांतीय स्तर कांग्रेसीजनों की लंबी फौज से बेचैन भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तंवर को उनके क्षेत्र में ही चुनौती देने के लिए फतेहाबाद में दलित महापंचायत का आयोजन रखा है। इससे पूर्व भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रानियां कस्बे में अपनी जनसभा रखी थी, मगर उसे रद्द कर दिया था। दलित दिग्गज डॉ. तंवर का राजनीतिक विरोध कमिश्नरी क्षेत्र हिसार में होने वाली दलित महापंचायत का आयोजन दलित वर्ग को रास नहीं आ रहा, जिस कारण क्षेेत्र के दलित समुदाय में इस दलित महापंचायत को लेकर हुड्डा समर्थकों में विशेष उत्साह नहीं देखा जा  रहा है। हुड्डा समर्थक कई कांग्रेसी दिग्गज भी इस महापंचायत को लेकर चुप्पी साधे हुए है। खुफिया सूत्रों की रिपोर्ट को देखते हुए भूपेंद्र हुड्डा ने प्रदेशभर से अपनी फौज को दलित महापंचायत की सफलता के लिए मोर्चा खोलने का फरमान सुना दिया है। हुड्डा समर्थक मौजूदा दलित विधायकों ने हिसार कमिश्नरी में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और अपने स्तर पर दलित वर्ग से संपर्क बनाए हुए है। इन दलित नेताओं को उस समय गहरा राजनीतिक झटका लगता है, जब दलित वर्ग का शिक्षित तथा बुद्धिजीवी वर्ग डॉ. अशोक तंवर की अनदेखी के सवाल खडे कर देता है। दलित वर्ग की पंसदीदा बन चुके दलित दिग्गज डॉ. अशोक तंवर का राजनीतिक विरोध तथा भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों द्वारा मारपीट का मामला संसदीय क्षेत्र सिरसा तथा हिसार में खूब उछल रहा है। दलित महापंचायत में दलित दिग्गज कांग्रेसी नेता की अनुपस्थिति और जाट वर्ग से संबंधित पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का मुख्यातिथि होने से दलित वर्ग एक उलझन में उलझ कर रह गया है, क्योंकि इस महापंचायत को दलित वर्ग सरकार विरोधी न होकर अशोक तंवर विरोधी मानकर चल रहा है। 26 नवंबर को दलित महापंचायत की कैसी तस्वीर रहेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर फिलहाल इस महापंचायत को लेकर दलित वर्ग में कोई उत्साह नहीं देखा जा रहा है।

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