मैं चाहे ये करुं-मैं चाहे वो करुं मेरी मर्जी

प्रैसवार्ता न्यूज, सिरसा, 29 नवंबर (जीएन भार्गव)। शहर में यातायात नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर दोपहिया वाहन चला रहे नाबालिग बच्चों ने खुद के साथ-साथ दूसरों के जीवन को भी खतरे में डाल रखा है। नौसिखिए बेतरतीबी से सड़कों पर वाहन दौड़ाते देखे जा सकते है। इनकी वजह से दुर्घटनाएं भी होती रहती है लेकिन हाथ-पांव टूटने या जान के जोखिम से बेपरवाह इन नाबालिगों को परिजनों से मिली छूट का ही परिणााम है कि आज शहरों की सड़कों पर चलने में सबसे अधिक खतरा इन नाबालिग वाहन चालकों से उत्पन्न हो चुका है लेकिन जब कोई दुर्घटना हो जाती है तो इसका ठिकरा पुलिस के सिर फोड़ दिया जाता है।
यातायात नियमों से अनजान है ये नाबालिग चालक:-
यातायात नियमों से पूरी तरह अनजान एवं वाहन के संचालन से अनभिज्ञ इन बच्चों में कईयों के तो वाहन पर बैठने के बाद पांव भी जमीन तक नहीं पहुंचते। आगे चल रहे वाहन चालक द्वारा अचानक बे्रेक लगाने अथवा किसी अन्य परिस्थिति में उन्हें वाहन की गति धीमी करनी पड़े या वाहन रोकना पड़े तो ये नन्हें चालक बड़ी मुश्किल से सड़क पर एक तरफ पूरा पांव टिका पाने में कभी कभार ही सफल हो पाते है। हड़बड़ाहट में ये अक्सर चोटिल होते भी देखे गए है। यह सब प्रतिदिन अपनी आंखो से देखने के बावजूद शहर के संभ्रांत नागरिक एक-दूसरे की नकल एवं खुद को धनवान प्रमाणित करने की होड़ में अपने बच्चों को बालिग होने तक वाहन चलाने के लिए पाबंद करने के बजाय उनकी पीठ थपथपा रहे है। शहर के अधिकांश विद्याालयों के बच्चों के पास वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। आज शहर का शायद ही कोई विद्यालय होगा, जिसके वाहन स्टैंड पर दर्जनों की संख्या में स्कूटर, मोटरसाईकिल, स्कूटी इत्यादि रोजना खड़े नहीं होते हो। जब ये बालक बिना हेलमेट के सड़क पर वाहन दौड़ाते है तो बड़ोंं की बनिस्पत ये ज्यादा और जल्दी दुर्घटना एंव गंभीर परिणामों का शिकार होते है पर कोई करे भी तो क्या, जब माता-पिता को ही अपने बच्चों की सुरक्षा की ङ्क्षचता न हो।
नन्हें चालकों पर अध्यापकों की समझाईश का नहीं होता कोई असर:-
अनेकों बार विद्यालय संचालकों ने विद्याॢथयों को हेलमेट के लिए पाबंद किया तो उन्हें देखकर हैरानी हुई कि विद्यालय से निकलकर मोड़ मुड़ते ही लगभग सभी वाहन चालक बच्चों ने ब्रेक लगाई, हेलमेट उतारकर हैंडल पर लटकाया और चल पड़े। इसी प्रकार की स्थिति दुपहिया वाहन चलाने वाली महिलाओं की है। शहर में 90 प्रतिशत वाहन चालक महिलाएं वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग तो करती ही नहीं, साथ में उनके पास ड्राईङ्क्षवग लाईसेंस भी नहीं होते, जो उनकी ड्राईङ्क्षवग योग्यता को साबित कर सके। सरेआम तार-तार हो रहे यातायात नियमों के लिए प्रमुख तौर पर जिम्मेवार हमारा समाज, प्रशासन अपना दायत्वि कब समझेगा? यह देखना है।

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