सीडीपीओ शुचि बजाज जीएन भार्गव, ऐलनाबाद प्रदेश के अधिकांश भागों में जहां तापमान 45 डिग्री के आसपास घूम रहा है वहीं बच्चों को तेज धूप ...

अनदेखी: आंगनबाड़ी बच्चों के नसीब में नहीं ग्रीष्मकालीन छुट्टियां, संचालिकाए झेल रही दोहरी मार

सीडीपीओ शुचि बजाज
जीएन भार्गव, ऐलनाबाद
प्रदेश के अधिकांश भागों में जहां तापमान 45 डिग्री के आसपास घूम रहा है वहीं बच्चों को तेज धूप व लू से बचाने के लिए कहीं विद्यालयों का समय बदला जा रहा है तो कहीं ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिए गए है ताकि स्कूली बच्चों को प्रचंड गर्मी व ताप घात की बीमारियों से बचाया जा सके। सरकार के इन आदेशों से जहां प्रदेश के नौनिहाल खुश है वहीं आंगनबाड़ी केंद्रो के 3 से 6 वर्ष की आयु के कोमल बच्चे स्वयं को ठगा सा महसूस करते हुए नन्हीं आंखों से हर अधिकारी से सवाल करते दिखाई देते है कि क्या वे इसके हकदार नहीं है? उन्हें कभी ग्रीष्कालीन अवकाश भी नहीं दिए  जाते। इतना ही नहीं इन केंद्रों की संचालिकाएं भी दोहरी मार झेलने को विवश है।
                      अनेक केंद्र संचालिकाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बच्चों को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक आंगनबाड़ी केंद्रों में रोके रखना उनका दायित्व है, लेकिन दोपहर 12 बजे की तपती धूप में बच्चों को घर जाते समय अगर चक्कर आ जाए या लू लग जाए तो बच्चे के परिजन हाथ धो कर पीछे पड़ जाते है। यदि आंगनबाड़ी केंद्र संचालिकाएं बच्चों के मां-बाप के दबाव व गर्मी से बदहाल हो रहे बच्चे की तरफ देखकर उसे समय से पहले घर भेज दें तो विभागीय अधिकारियों की प्रताडऩा का शिकार होना पड़ता है। गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए विभिन्न नीजि एवं राजकीय विद्यालयों द्वारा ग्रीष्कालीन छुट्टियां कर दिए जाने का जहां अभिभावकों ने स्वागत किया है वहीं दूसरी ओर छुट्टियां न किए जाने से आंगनबाड़ी केंद्र संचालिकाओं ने बताया कि उनके केंद्र आज भी 9 से 12 बजे तक खुल रहे है, जबकि छुट्टियों की आवश्यकता आंगनबाड़ी के इन छोटे बच्चों को अधिक होती है। 
                          तेज गर्मी के चलते छोटे बच्चे चक्कर खाकर गिर जाते है आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ताओं ने बताया कि इन दिनों अनेक बच्चे तेज गर्मी के चलते घबराहट महसूस करते हुए चक्कर खाकर गिर जाते है। ऐसे में बच्चों को दोपहर 12 बजे तक केंद्रों पर रोके रखना आसान साबित नहीं हो रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों की मुश्किलें यहीं समाप्त नहीं होती। उनके अनुसार सरकार उन्हें राज्य कर्मचारी भी नहीं मानती और तो ओर इन्हें वेतन के नाम पर मात्र 11429 रुपए मासिक मानदेय दिया जाता है।
आंगनबाड़ी केंद्र भवन के किराये के लिए मिलते है मात्र 200 रुपए प्रतिमाह:-
                           आंगनबाड़ी भवन के किराये के नाम पर मात्र 200 रुपए प्रतिमाह देने का प्रावधान है और पिछले तीन सालों से ये 200 रुपए भी नहीं दिए जा रहे। उनका मानना है कि 2 हजार रुपए प्रतिमाह से कम किराये पर भवन उपलब्ध ही नहीं हो रहे है। इन केंद्रों में न गर्मी की छुट्टियां होती है और ना ही सर्दियों की। जबकि उनके कार्यों में न सिर्फ नौनिहालों, धात्री व गर्भवती महिलाओं को संभालना है बल्कि फिल्ड में जाकर दुनिया भर के सर्वे भी करने पड़ते है। सर्वे के अलावा गांव में जन्म, मृत्यु के रिकॉर्ड, टीकाकरण, पल्स पोलियो अभियान, लाडली बेटी योजना का कार्यभार भी इन्हीं के कंधों पर होता है। प्रत्येक केंद्र संचालिका पर 45 से 50 बच्चों एवं 16 से 18 धात्री व गर्भवती महिलाओं की देखरेख की जिम्मेदारी होती है। 
बोली विभाग की सीडीपीओ:-
                              विभाग की सीडीपीओ शुचि बजाज ने संवाददाता को बताया कि ऐलनाबाद में 18 व पूरे ब्लॉक में 174 आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे है। नीजि भवनों में चलने वाले केंद्रों के लिए 200 रुपए प्रतिमाह किराया सरकार द्वारा दिया जाता है। किराया बढ़ाने संबंधी मांग लिखित में उच्चाधिकारियों को भेजी हुई है। अधिकारियों ने केंद्र संचालिकाओं की मांग पर सर्दी व गर्मी की छुट्टियां शुरु करने का आश्वासन दिया हुआ है लेकिन अभी तक हमारे पास लिखित में नहीं पहुंचा है जिस दिन हमारे पास लिखित में आ जाएगा उसी दिन से गर्मी व सर्दी की छुट्टियां शुरु कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने भवन के नाम पर साढे सात सौ रुपए प्रतिमाह किराया देने की बात मानी है लेकिन उसमें शौचालय, कमरे का साईज, पेयजल व्यवस्था आदि की अनेक शर्तंे रखी गई है जो कि इस साढ़े सात सौ रुपए में पूरी होने वाली नहीं है।

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