सिरसा (प्रैसवार्ता)। राजस्थान, पंजाब की सीमा से सटा हरियाणा राज्य का जिला मुख्यालय सिरसा, जो देशभर में नशे की खुश्क बंदरगाह तथा नशे के...

पुलिस कप्तान सिरसा का एक महीना : अपराधियों को छूटा पसीना





सिरसा (प्रैसवार्ता)। राजस्थान, पंजाब की सीमा से सटा हरियाणा राज्य का जिला मुख्यालय सिरसा, जो देशभर
में नशे की खुश्क बंदरगाह तथा नशे के सौदागरों के लिए सोने की खान बन चुका था, आजकल अपराधियों के लिए दहशत के साये में देखा जाने लगा है। सिरसा के मौजूदा पुलिस अधीक्षक हामिद अख्तर ने अपने कार्यकाल के एक महीने में नशा तस्करों के पसीने छुडा दिये हैं। नशे के खिलाफ पुलिस के प्रबल प्रहार मुहिम से नशा तस्कर अपने ठौर ठिकाना बदलने पर मजबूर हो रहे हैं। पुलिस कप्तान अख्तर की अलग कार्यशैली से पुलिसिया तंत्र भी सकते में हैं, क्योंकि लापरवाही-कोताही पुलिस कप्तान को बर्दाशत नहीं। सेवा,सुरक्षा और सहयोग के हरियाणा पुलिस के लोगो को अमलीजामा पहनाने तथा जनता के दिमाग से पुलिसिया भय समाप्त करने का लक्ष्य लेकर पुलिस कप्तान अख्तर ,जिस कद्र प्रयास कर रहें हैं,लोगों में प्रंशसनीय दिखाई देता है और जनता का सहयोग भी उन्हें मिलने लगा है। पुलिस को मिल रहे जन सहयोग से अपराधिक प्रवृति के लोगों में हडकंप मच गया है।ऑप्रेशन प्रबल प्रहार ,जहां जनप्रिय हो रहा है,वही अपराधी वर्ग और उनके समर्थक राजसी दिग्गज पुलिस कप्तान को दूसरे नजरिये से देखते हुए इसे सस्ती लोकप्रियता का पैमाना मानते हुए दलील देते हैं कि सिरसा कल्ब में प्रतिदिन लाखों रूपयों का जुआ और खुले शराब के दौर चलते हैं,उन पर पुलिस की ठंडी नजर क्यों। शराब के अवैध अहाते,अवैध शराब की बिक्री करने वालों पर पुलिसिया शिकंजा कसने के बाद शराब के ठेकेदारों द्वारा शराब के रेट बढाने से भी कई चर्चांए शुरु हो गई है,जिन्हें लेकर पुलिस कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। पुलिस कप्तान का सोशल मीडिया से जनता को जागरूक करना और स्वंय फोन पर हर समय उपलब्ध रहना जिलावासियों के किसी अचंम्बे से कम नहीं कहा जा सकता। पुलिस कप्तान अख्तर के एक महीने की धुंआधार बैंटिंग से जिलावासियों को काफी उम्मीदें है। क्या अपराधियों के मंसूबों पर "ग्रहण" लगाने में हामिद अख्तर सफल हो पायेगें,यह तो आने वाला समय ही बतायेगा,मगर एक महीने की बैटिंग से अपराधी तथा लापरवाह,कोताही बरतने वाले पुलिस कर्मी जरूर सकते में हैं।

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